पैसा बांटो- राज करो!
सिर्फ विजय या स्टालिन को ही दोष क्यों दिया जाए? किसी राज्य या यहां तक कि केंद्र के बजट पर गौर करें, तो यही कहानी घटित होती दिखती है। पैसा बांटो, वोट खरीदो- सबका मकसद है। तमिलनाडु की सत्ता संभालते ही सी. जोसेफ विजय ने वो रोना रो दिया, जो अब राज्यों में बनने वाली हर नई सरकार के मुखिया करते हैं! आरोप लगाया कि पूर्व डीएमके सरकार राजकोष को बदहाल छोड़ गई है, जिसका ब्योरा उनकी सरकार एक श्वेत पत्र जारी कर देगी। कहा कि राज्य पर दस लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बावजूद थलापति (कमांडर) पुकारे...