क्षेत्रीय दलों का भी लेफ्ट जैसे हिसाब बराबर!
ताजा चुनाव नें क्षेत्रीय दलों का भविष्य दिखला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार, तमिलनाडु में स्टालिन की फिसलन और केरल में वामपंथ की कमजोर होती पकड़ ने बाकि क्षेत्रीय दलों को भी बैचेन कर दिया होगा। है। सवाल सीधा है, क्या क्षेत्रीय दल 2029 के आते-आते खत्म नहीं हो जाएंगे? क्या यह त्रासदी है या मंडल राजनीति का देर से हो रहा हिसाब बराबर! रिकॉर्ड देखें तो जवाब दूसरा है। क्षेत्रीय दलों ने भारत को जोड़ा कम, बांटा ज्यादा। राजनीति को जातियों में और जातियों को वोट बैंक में बदल दिया गया। शासन भी धीरे-धीरे...