NDA government

  • चांद से जमीन पर उतरे

    हाल पहले से बुरा है या अब बिगड़ा है, यह फिलहाल अप्रसांगिक सवाल है। आज की हकीकत यह है कि हम सबके आसपास- भौतिक और मानव दोनों तरह के- इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थितियां जर्जर होती जा रही हैं। बुनियाद ही जर्जर दिखने लगी है। बारिश के कारण तीन दिन में तीन हवाई अड्डों के छज्जे गिरे। एक अन्य जगह पानी टपकता दिखा। नई दिल्ली में तो इस हादसे में एक मौत भी हुई। राष्ट्रीय राजधानी में बारिश शुरुआती और साधारण थी। फिर भी वीआईपी इलाकों समेत लगभग पूरे शहर में तालाब जैसा नजारा बन गया। देश के सबसे बड़े अस्पताल- एम्स-...

  • बिहार, आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा!

    लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात बड़ी तेजी से चली थी। कहा जा रहा था कि जनता दल यू और तेलुगू देशम पार्टी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तभी समर्थन मिलेगा, जब दोनों राज्यों के लिए विशेष राज्य के दर्जे का ऐलान होगा। लेकिन यह अनुमान भी वैसे ही गलत साबित हो गया, जैसे कई मंत्री पद, भारी भरकम मंत्रालय और स्पीकर का पद लेने का अनुमान था। अब कहा जा रहा कि केंद्र सरकार किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने जा रही है। जानकार सूत्रों...

  • जगन और नवीन की जरुरत बनी रहेगी

    आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में बुरी तरह हारी। लोकसभा में राज्य की 25 में से सिर्फ चार सीटें उसे मिली, जबकि पिछली बार उसने 22 सीटें जीती थी। विधानसभा की 175 में से सिर्फ 11 सीट जगन की पार्टी को मिली। इसी तरह ओडिशा में लोकसभा चुनाव में नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल का सफाया हो गया। पार्टी 21 में से एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। राज्य की 147 विधानसभा सीटों में उसे 51 सीटों पर जीत मिली। इस नतीजे के बाद दोनों का महत्व समाप्त हो...

  • भारत की विकास गाथा जारी रहेगी

    सरकार समान नागरिक संहिता पूरे देश में लागू करने के अपने संकल्प पर भी आगे बढ़ेगी। सहयोगी पार्टियों के साथ सहमति बनाते हुए यह काम किया जाएगा। ध्यान रहे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही कह दिया है कि सरकार बहुमत से बनती है लेकिन राजकाज सर्वमत से चलता है। इसलिए वे सर्वमत बनाते हुए अपने इस एजेंडे को आगे ले जाएंगे। एस. सुनील प्रलय की भविष्यवाणी करने वालों को निराशा हुई है। सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को किसी के सामने झुकना नहीं पड़ा और न कोई समझौता करना पड़ा। इतना ही नहीं सहयोगी पार्टियों...

  • सरकार पर दबाव तो बढ़ेगा!

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • राज्यों के चुनाव का इंतजार

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • शासन की निरंतरता और गठबंधन की मजबूरी

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • माफियाराज को समाप्त करेगी एनडीए सरकार: विजय सिन्हा

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • केंद्रीय मंत्रियों ने कामकाज संभाला

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • असली और नकली राजा

    भाजपा को ले कर मीडिया और सोशल मीडिया में जो सन्नाटा था वह टूटता दिख रहा है। इसलिए क्योंकि सरकार के गठन और मंत्रालयों के बंटवारे में ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में नहीं आए हैं। उन्होंने सरकार का समर्थन करने वाली बड़ी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद नहीं दिए। कई सहयोगी पार्टियों को तो सरकार में भी शामिल नहीं किया। साथ ही मंत्रालयों का बंटवारा भी अपने हिसाब से किया। सारे अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं के पास रहे, जबकि सहयोगी पार्टियों के नेताओं को कम महत्व और कम बजट...

  • जोखिम भरी ये राह

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  • मोदी के तीसरे कार्यकाल की चुनौतियां

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  • सहयोगियों में मंत्री पद पर खींचतान

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  • तीन करोड़ मकान बनाने का फैसला

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  • जदयू की ओर से दबाव की राजनीति

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  • इस बार प्रोटेम स्पीकर कौन होगा?

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  • हारा हुए नेताओं में अधिकांश मंत्री नहीं

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  • शपथ से पहले मोदी ने बताया अपना एजेंडा

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  • अब जाकर खुली आंख!

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  • मोदी लड़खड़ाए तो गड़बड़ाएं उन पर लगे बड़े-बड़े दांव

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