New year 2026

  • 2026 में ढोल ही ढोल!

    साल 2026 की उम्मीदों में दुनिया के दूसरे देशों में जैसा सोचा जा रहा है वैसे हमें न सोचना चाहिए, न लिखना चाहिए। आखिर हमारी अलग ही हस्ती है। सो, व्यर्थ है यह सवाल कि छब्बीस में भारत की सेहत, सांस क्या बेहतर होगी? इतना जरूर है कि मौजूदा मोदी राज जिन चार पायों पर टिका है वे और मजबूत होंगे। मतलब मोदी राज में- भीड़, ढोल, रेवड़ी तथा आंकड़ों में विकासमान उछाला गारंटीशुदा है। 2026 के अंत में भीड़ का आकार बढ़ा हुआ होगा। भीड़ को रेवड़ियों से नचाने के नए कार्यक्रम बने हुए होंगे। आंकड़े और हवा-हवाई बने...

  • 2026 में पराश्रित ‘विकसित भारत’!

    कुछ-कुछ 2025 जैसा ही 2026 में संभव। ऊपर से भौकाल मचाते आंकड़े वही जमीनी असलियत में खोखला। विश्व बाजार में पिछले साल भारत का रुपया लुढ़का वही आर्थिकी तथा बाजार की रौनक चीनी कारखानों के उत्पादों पर आश्रित। वैश्विक वास्तविकताओं में यह हमेशा सुना गया है कि जो विकसित है या विकसित होता हुआ है तो उसकी करेंसी उसी अनुपात में मंहगी, मूल्यवान होती है। वहां के नागरिकों के पासपोर्ट का मान बढ़ता है। पर मोदी राज के हवाबाज ढोलों का कमाल है जो रुपया, निर्यात लुढके, बेरोजगारी बढ़ी मगर फिर भी ब्रिटेन, जापान, जर्मनी सभी को भारत पछाड़ता हुआ।...

  • भीड़ बढ़ती जाएगी

    भारत दर्शन का मतलब भीड़ का दर्शन है। नए साल की शुरुआत देश भर के धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों, होटलों या रेस्तरां में भीड़ की खबरों से हुई है। पिछले एक हफ्ते से देश के अलग अलग धर्मस्थलों से लोगों के जुटने की जैसी खबरें आईं, उनसे इस बात की पुष्टि हुई कि भारत के लोगों को ज्यादा से ज्यादा धार्मिक बनाने का भारत सरकार और भाजपा का प्रोजेक्ट सफल हुआ है। एक समय ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ के नारे लगते थे लेकिन तब लोग इस पहचान को लेकर इतने सीरियस नहीं थे। आज यह नारा नहीं लगता...

  • भीड़ सैर-सपाटा और टाईमपास भी बढ़ेगा

    साल की शुरूआत की खबर थी कि दिल्ली के चिड़ियाघर में 25 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। इंडिया गेट और आसपास पर एक लाख लोग जमा हो गए। दिल्ली की सड़कों पर ऐसा जाम लगा कि खान मार्केट से इंडिया गेट की दो किलोमीटर की दूरी तय करने में एक एक घंटा लगा। जम्मू कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बने भय और आशंका के बावजूद हजारों लोग जम्मू कश्मीर पहुंचे। अकेले पहलगाम की खबर है कि आठ हजार कमरों की बुकिंग हुई थी। गुलमर्ग के होटलों में सौ फीसदी बुकिंग हुई। मनाली, शिमला, देहरादून आदि जगहों पर तो...

  • नए साल का संदेशः हौसला नहीं छोड़ना !

    नया साल उत्साह भरता है। पर देखे नए साल का भी ....कोई पाइंट ऐसा नहीं होना चाहिए जहां से आप आगे बढ़ सकें। हर चीज में शक पैदा कर दो उसे अस्वीकार्य घोषित कर दो ताकि सिर्फ ढलान ही ढलान बचे। अब कविता बना रहे है कि  ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं। हिम्मत होती तो आईटी सेल इसे लिखने वाले के नाम से प्रचारित करता। मगर इनका एक कवि नहीं जिसका नाम हो और उस नाम से कविता एकदम से क्लिक कर जाए। ... तभी दिनकर के नाम की मिलावटी तुकबंदी है। नया साल नए साल जैसा ही होना...

  • उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो!

    नई सुबह और नई उम्मीदों के साथ नए साल का स्वागत है। बीता हुआ साल अच्छा नहीं था। अप्रैल में पहलगाम में बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें देश के अलग अलग हिस्सों के 25 बेकसूर सैलानियों और एक स्थानीय कश्मीर व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए छह और सात मई की दरम्यानी रात को आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया लेकिन दुर्भाग्य से यह ऑपरेशन पाकिस्तान के साथ सीमित युद्ध में बदल गया। पहले के बालाकोट या उरी स्ट्राइक से उलट पाकिस्तान ने जवाबी हमला कर दिया। इसका...

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