साल की शुरूआत की खबर थी कि दिल्ली के चिड़ियाघर में 25 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। इंडिया गेट और आसपास पर एक लाख लोग जमा हो गए। दिल्ली की सड़कों पर ऐसा जाम लगा कि खान मार्केट से इंडिया गेट की दो किलोमीटर की दूरी तय करने में एक एक घंटा लगा। जम्मू कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के बाद बने भय और आशंका के बावजूद हजारों लोग जम्मू कश्मीर पहुंचे। अकेले पहलगाम की खबर है कि आठ हजार कमरों की बुकिंग हुई थी। गुलमर्ग के होटलों में सौ फीसदी बुकिंग हुई। मनाली, शिमला, देहरादून आदि जगहों पर तो गाड़ियों की एंट्री रोक दी गई थी। जिन लोगों के पास होटल की बुकिंग थी उन्हीं की गाड़ी को शहर में प्रवेश की इजाजत थी। फिर भी हजारों लोगों की गाड़ियों से पूरा रास्ता जाम पड़ा रहा। महानगरों के मॉल भरे हुए थे और रेस्तरां में खाने के लिए घंटों की वेटिंग थी।
यह भीड़ भारत की पहचान है, जो हर जगह है। खबर चली है कि जापान को पीछे छोड़ कर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गया। लेकिन पांच किलो अनाज लेने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है। 80 करोड़ से ज्यादा लोग पांच किलो अनाज ले रहे हैं। अलग अलग राज्यों में महिला सम्मान के नाम पर शुरू हुई योजनाओं में भीड़ है। पुरुष भी महिला बन कर पैसे के लिए आवेदन कर रहे हैं। जिनका खेती से कोई लेना देना नहीं है वे भी किसान सम्मान के पैसे उठा रहे हैं। जिन राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर चल रहा है वहां बूथ लेवल अधिकारी भीड़ से घिरे हैं। हजारों लोग अपने पहचान और जन्म के दस्तावेज लेकर बीएलओ के पीछे घूम रहे हैं।
नौकरी की भीड़ ऐसी है कि चपरासी की नौकरी के लिए एमए पास और एमबीए कर चुके लोग आवेदन कर रहे हैं। एक पद के लिए 10 हजार लोग आवेदन कर रहे हैं। गांवों की भीड़ निकल कर शहरों की ओर चल पड़ी है। शहरी जीवन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो रहा है लेकिन शहरों में भीड़ बढ़ती जा रही है। शहरों में ऑफिस जाने वाले घंटों तक सड़कों पर ट्रैफिक में रहते हैं। ट्रेनों की भीड़ तो हर दिन दिखाई देती थी इस बार इंडिगो का संकट हुआ तो हवाई यात्रियों की भीड़ भी दिखी। शहरों के अमीर लोगों ने पहाड़ों और जंगलों पर हमला किया। वहां फार्म हाउस और रिसॉर्ट, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, जिम आदि बन रहे हैं। इसका नतीजा है कि जंगली जानवर शहरों में लोगों के घरों तक पहुंचने लगे हैं।
नए साल में और आने वाले कई सालों में यह भीड़ कम नहीं होने वाली है। यह भीड़ बढ़ती जाएगी। 140 करोड़ लोगों का देश डेढ़ सौ करोड़ का आंकड़ा छुएगा और उससे भी आगे जाएगा। हिंदू धर्म गुरुओं से लेकर नेता और सामाजिक संगठनों के लोग हिंदुओं से आबादी बढ़ाने की अपील कर रहे हैं। कम से कम तीन बच्चे पैदा करने का आह्वान किया जा रहा है। धर्म बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी बताया जा रहा है। क्योंकि मुस्लिम आबादी बढ़ने की दर कम नहीं हो रही है। भारत में कामकाजी उम्र यानी 16 से लेकर 64 साल तक के लोगों की आबादी 50 करोड़ से ज्यादा है। लेकिन ज्यादातर के लिए कोई सम्मानजनक काम नहीं है। छोटे शहरों से लेकर राजधानी दिल्ली तक रोजगार के नाम पर ई रिक्शा की हुजूम है या रील बनाने वालों की भीड़ है या मोमोज, चाउमीन, छोले भटूरे और लिट्टी चोखा बेचने वालों की रेहड़ी है।
दुखद है लेकिन दिलचस्प है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में अनेक कोर्स में इस अकादमिक सत्र में सीटें खाली रह गईं। दाखिला कराने छात्र नहीं पहुंचे। देश में पांच हजार से ज्यादा ऐसे स्कूलों की पहचान हुई है, जहां एक भी छात्र नहीं हैं। दस से कम छात्रों वाले स्कूलों की संख्या 2022-23 में 52 हजार थी, जो 2024-25 में बढ़ कर 65 हजार हो गई है। सोचें, एक तरफ ऐसी बेहिसाब भीड़ और दूसरी ओर स्कूल, कॉलेजों में छात्र नदारद हैं! कहां जा रहे हैं स्कूल जाने वाले बच्चे? इसकी पड़ताल होनी चाहिए कि क्या कागजों पर स्कूल चलाए जा रहे हैं या सचमुच पढ़ने वाले बच्चे कम हो गए? भीड़ तो कम नहीं हुई फिर स्कूल, कॉलेजों में छात्र कैसे कम हो रहे हैं? इंजीनियरिंग और एमबीए कॉलेजों के बंद होने की खबरें पुरानी हो गईं।


