बड़ी, पर अधूरी कामयाबी
टीआरएफ या लश्कर-ए-तैयबा के कुछ ठिकानों को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने निशाना बनाया। लेकिन उनके समर्थन का पूरा तंत्र नष्ट हो गया है, यह नहीं कहा जा सकता। जब तक यह नहीं होता, हर कामयाबी अधूरी मानी जाएगी। आतंकवादी संगठन ‘द रेजिस्टैंस फोर्स’ (टीआरएफ) को ‘विदेशी दहशतगर्द संगठनों’ और ‘खास तौर पर चिह्नित वैश्विक आतंकवादी संगठनों’ की सूची में डालने का अमेरिका का फैसला स्वागतयोग्य है। इसे भारतीय कूटनीति की सीमित कामयाबी भी समझा जाएगा। टीआरएफ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन है। उसने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली थी। तब से भारत सरकार का प्रयास रहा...