राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

स्पेस टेक्नोलॉजी भारत की ताकतों में से एक

राष्ट्रीय राजधानी में 15 से 17 जून तक इंडिया स्पेस कांग्रेस (आईएससी) 2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कई देशों के नीति-निर्माता, राजनयिक, अंतरिक्ष विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य, वैश्विक साझेदारियों और नई तकनीकों पर चर्चा करना है। 

इस बीच, थाईलैंड की जियो-इन्फॉर्मेटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (जीआईएसटीडीए) के उप-कार्यकारी निदेशक फी चूसरी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक संबंध रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी एजेंसी थाईलैंड में अंतरिक्ष गतिविधियों और भू-स्थानिक तकनीकों की जिम्मेदारी संभालती है।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में भाग लेने के बाद उन्हें भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की तेजी से बढ़ती क्षमता का बेहतर अंदाजा हुआ है। उनके अनुसार, भविष्य में दोनों देशों के बीच केवल सरकार-से-सरकार (जीटूजी) ही नहीं बल्कि बिजनेस-टू-बिजनेस (बीटूबी) स्तर पर भी सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इस साझेदारी का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

फी चूसरी ने आईएएनएस से कहा कि अंतरिक्ष तकनीक भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बनने जा रही है। उपग्रहों की लागत में लगातार कमी आ रही है क्योंकि अब उनका उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और उन्हें लॉन्च करने की मांग भी बढ़ेगी।

Also Read : रूस के भीषण हमलों से दहला यूक्रेन, कीव की ऐतिहासिक कैथेड्रल चर्च में आग, 11 की मौत

उन्होंने आगे कहा कि दूरसंचार और पृथ्वी अवलोकन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष गतिविधियों का विस्तार तेजी से होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर नई आर्थिक और तकनीकी संभावनाएं पैदा होंगी।

इसके साथ ही, भारत में ताइपे आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधि मुमिन चेन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी ताकतों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इंडिया स्पेस कांग्रेस जैसे मंच अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत की उपलब्धियों और उसकी संभावनाओं को करीब से देखने का अवसर प्रदान करते हैं।

मुमिन चेन ने कहा कि ताइवान सेमीकंडक्टर और कंप्यूटर चिप निर्माण में विश्व स्तर पर अग्रणी है और उसके पास अंतरिक्ष तकनीक का भी मजबूत आधार है। उन्होंने बताया कि अतीत में भारत और ताइवान के बीच वैज्ञानिक सहयोग रहा है, लेकिन अब अंतरिक्ष क्षेत्र में व्यावसायिक और रणनीतिक सहयोग की भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक भविष्य में न केवल वैज्ञानिक बल्कि व्यावसायिक और रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में भारत और ताइवान के बीच सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

स्पेस इंडस्ट्री एसोसिएशन-इंडिया (एसआईए-इंडिया) द्वारा आयोजित इंडिया स्पेस कांग्रेस का यह पांचवां संस्करण “अंतरिक्ष की नई कल्पना, सहयोग का नया रूप, अंतरिक्ष के अगले दौर को साकार करना” थीम पर आधारित है।

इस सम्मेलन में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, निवेश के नए अवसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, पृथ्वी अवलोकन तकनीक, डुअल-यूज टेक्नोलॉजी, एआई आधारित स्पेस डेटा एनालिटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, अंतरिक्ष विनिर्माण, संसाधन उपयोग और सर्कुलर स्पेस इकोनॉमी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।

Pic Credit : ANI

By Naya India

Naya India, A Hindi newspaper in India, was first printed on 16th May 2010. The beginning was independent – and produly continues to be- with no allegiance to any political party or corporate house. Started by Hari Shankar Vyas, a pioneering Journalist with more that 30 years experience, NAYA INDIA abides to the core principle of free and nonpartisan Journalism.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

five × two =

और पढ़ें