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Wednesday, April 14, 2021
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श्रुति व्यास कॉलम

रोया दीया और अचानक।।।वे क्षण, वह मूड!

दिन 28 जनवरी। वक्त कोई रात के 9.30 बजे। दिन भर दिल्ली की सिंघू सीमा पर किसानों का मूड समझने-बूझने के बाद मैं गाजीपुर के प्रदर्शनस्थल पर थी। सब कुछ नियंत्रित और शांत।

बरबाद, फेल देश छोड़ कहां जाएं लोग?

त्रासदियां भुले हुए को, बिछुड़ों को मिलाती हैं। हाल की त्रासद घटना ने मुझे अपनी उस पुरानी दोस्त से फिर मिला दिया जिसे मैं सालों से भूली बैठी थी। मैं रैने से 2006 में तब मिली थी जब हम दोनों सेंट एंड्र्यू में साथ पढ़ते थे।

त्रासद है यह नया भारत

इतिहास रचने वालों को अपने खाते में वह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करनी होती है जो न केवल एक विरासत के रूप देखी जाती है, बल्कि इतिहास को भी नए सिरे से परिभाषित करती है।

कोविड के बाद की खौफभरी दुनिया

कोविड के बाद की दुनिया कैसी होगी? जिस तरह की नई वैश्विक व्यवस्था सामने आएगी, उसमें जिंदगी कैसी होगी, हम कैसा महसूस करेंगे? ये सन् 2020 के ऐसे बुनियादी सवाल हैं जो ह सबको हैरान-परेशान किए हुए हैं।

कब तक दामाद बना रहेगा कश्मीर !

कश्मीर क्या है, यह समझ पाना आसान नहीं है और कश्मीर की समस्या कैसे सुलझाए यह यक्ष प्रश्न है।  साल पहले संविधान के अनुच्छेद 370 को निप्षप्रभावी करते हुए एक साहसी कदम उठाया गया था।

युवा नेताः विचार में सूखे, अवसर के भूखे!

सन् 2020 का वक्त विचार, विचारधारा और आदर्शो का नहीं है। न युवा राजनीति, यूथ नेता विचार और संर्घष में पके है। तब यदि यूथ नेता बदलते फैशन की तरह पार्टियां बदले, नए रंग आजमाए तो क्या आश्चर्य

यह कैसा नया वक्त, नई मौत!

तीन जून, चिलचिलाती गर्मी! जदीद कब्रिस्तान एहले इस्लाम में मंजूर खान अपनी भाभी का शव लेने के लिए दो घंटे से इंतजार कर रहा है।

बैचेन बनाने वाली चहल-पहल

हल्ला-गुल्ला, आवाजे फिर सुनाई देने लगी है। घर के बाहर चहल-पहल शुरू है। सामान बेचने वालों की आवाजें सुनाई पड़ने लगी हैं। फर्क यह है कि अब चेहरे पर मास्क लगे हैं। आसपड़ोस में भी फिर से कोलाहल शुरू हो गया है।

हेंकड़ी व दंभ की सत्ता का एक और साल

कहते है संकट से चीजे साफ होती है, लोगों का पता पड़ता है और स्पष्टता आती है। कोविड के संकट ने उसविरासत को जग-जाहिर कर दिया है जिसे नरेंद्र मोदी छोड़ कर जाएंगे।

न्यू इंडिया में अंधेरे वाली सुबह!

मानो सब कुछ खाक! सुनीता को बूझ नहीं रहा कि वह कहां है, चारों ओर क्या है!उसे तो बस बिहार लौटना है अपने दिवंगत हो चुके पति के पास। उसकी सूनी-घूमती आंखों से सिर्फ और सिर्फ घर लौटने की चीख निकल रही थी।

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