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ना गंभीरता, ना ईमानदारी

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लोग खुद ही अपनी सेहत को दांव पर लगाने पर आमादा हों, तो उस समाज को आखिर कौन बचा सकता है? डॉक्टर चेतावनी देते-देते थक गए हैं कि प्रदूषण जानलेवा भी हो सकता है। मगर जागरूकता और जवाबदेही का अभाव जस-का-तस है।

छठ के मौके पर दिल्ली में यमुना के प्रदूषण पर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच तू तू-मैं मैं अब इतनी आम हो गई है कि लोग उससे ऊबने लगे हैं। मुद्दा है कि जब यह स्थायी समस्या है, तो छठ के बाद उस पर इन दोनों पार्टियों का ध्यान क्यों नहीं होता, जिनकी केंद्र और (केंद्र शासित) प्रदेश में सरकारें हैं? फिर सामान्य दिनों में नागरिक समाज को भी इसकी कोई फिक्र नहीं होती। यही हाल दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस सीजन में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण की है। फिर वही हुआ। एक और दिवाली आई और फिर दिल्ली एनसीआर स्मॉग की चादर से ढक गया। पटाखों पर प्रतिबंध सिर्फ कागज पर रहा। लोगों ने जितनी मांग की, उतने पटाखे दुकानों में बिके, लोगों ने खरीदे और मन भर कर जलाए भी।

अब लोग खुद ही अपनी सेहत को दांव पर लगाने पर आमादा हों, तो उस समाज को आखिर कौन बचा सकता है? डॉक्टर चेतावनी देते-देते थक गए हैं कि प्रदूषण सिर्फ थोड़ी-सी खांसी ही नहीं देता, बल्कि यह जानलेवा तक साबित हो सकता है। मगर भारत में जागरूकता और जवाबदेही का अभाव जस-का-तस है। अब इस क्रम में एक अंतरराष्ट्रीय पहलू भी जुड़ा है। पाकिस्तान भी वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव झेल रहा है। खासकर लाहौर शहर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह कम दिलचस्प नहीं कि प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने लाहौर में खराब होती हवा के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा दिया है।

उनका कहना है कि भारत से आने वाली हवा अपने साथ प्रदूषण लेकर आती है, जिससे लाहौर की हवा खराब हो रही है। जबकि खुद पाकिस्तान में तैयार रिपोर्टों में कहा गया है कि खराब वायु गुणवत्ता के प्रमुख कारणों में उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं शामिल है। इसके अलावा खेती की पद्धति, जैव ईंधन और कचरे को जलाना और धूल इसके अन्य पहलू हैं। मगर गंभीर समस्या पर अगंभीर और बे-ईमान रुख की संस्कृति पाकिस्तान में भी कोई कम नहीं है। बहरहाल, ऐसे नजरियों से कुछ हासिल नहीं होगा, यह बात हर जागरूक व्यक्ति अवश्य ध्यान में रखना चाहिए।

By NI Editorial

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