ईरान होरमुज बंद करने में सक्षम बना हुआ है, इसलिए युदध थमने की उम्मीद जगने के बीच अक्सर ट्रंप का गरम रुख सामने आ जाता है। मगर हालात जल्द ही उन्हें नरम होने पर मजबूर कर देते हैं।
डॉनल्ड ट्रंप ईरान को तबाह कर देना चाहते हैं। उनकी ये मंशा हर उस कार्रवाई के बाद उग्र रूप में जाहिर होती है, जब ईरान अमेरिका को ललकारता नजर आता है। लेकिन जब उनके सैन्य सलाहकार बताते हैं कि अमेरिका के लिए नए हमले करना जोखिम भरा है और साथ ही उनकी धमकियों से महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरें बढ़ने लगती हैं, तो ट्रंप समझौते की दिशा में प्रगति का एलान करते हुए कदम पीछे खींच लेते हैं। जबकि ईरान जल्द ही ऐसी किसी प्रगति का खंडन कर देता है।
पिछले 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद कम-से-कम पांच बार ऐसा हुआ, जब ट्रंप ने ईरान को धरती से मिटा देने या उसके बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देने का अल्टीमेटम दिया। और हर बार उन्होंने कदम वापस खींचे। इस बीच सहमति-पत्र (एमओयू) पर दस्तखत के जरिए उन्होंने युद्ध के मकड़जाल से निकलने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने इसमें भी उनकी मदद नहीं की। ईरान सिर्फ इस शर्त पर युद्ध रोकने को राजी है कि अमेरिका होरमुज जलडमरूमध्य पर उसकी संप्रभुता स्वीकार करे। मगर ऐसा करना ना सिर्फ अमेरिकी, बल्कि लगभग 300 साल से जारी पश्चिमी वर्चस्व के पराभव पर अंतिम मुहर के रूप में देखा जाएगा।
इससे संदेश जाएगा कि साझा पश्चिम अब दुनिया भर में मुक्त नौवहन सुनिश्चित कराने में सक्षम नहीं रह गया है। अमेरिका के लिए इस बात को इतनी आसानी से पचा लेना आसान नहीं है। चूंकि ईरान होरमुज और यमन के अंसारुल्लाह (हूती) के जरिए बाब-ए-मंदाब जलमार्गों को बंद करने में सक्षम बना हुआ है, इसलिए हर बार युदध थमने की उम्मीद जगने के तुरंत बाद ट्रंप का गरम रुख सामने आता है और युद्ध तेज होने के संकेत मिलने लगते हैं। मगर परिस्थितियां जल्द ही उन्हें नरम होने पर मजबूर कर देती हैं। फिर वैसा ही हुआ है। फिलहाल, ट्रंप के इस दावे पर यकीन करना कठिन है कि खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश ईरान के साथ शांति समझौते के किसी फॉर्मूले पर पहुंच गए हैं। इसलिए युद्ध टलने की खबरें फ़ौरी राहत से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
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