एआई के कारण नौजवानों के लिए मध्यवर्गीय जिंदगी का सपना लगातार दूर होते जाने की आशंका है। भारत के नीतिकारों को इसका आभास है। मगर उनके पास इसका ठोस एवं सार्थक समाधान भी है, ऐसा कोई संकेत उन्होंने नहीं दिया है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से वित्त, प्रबंधन, कंप्यूटर साइंस, गणित, इंजीनियरिंग, विधि और कार्यालय प्रशासन के क्षेत्रों में मौजूद रोजगार पर सबसे अधिक खतरा है। इन क्षेत्रों में एआई के जरिए सबसे पहले उन कार्यों को करना शुरू किया गया है, जिसे सबसे जूनियर कर्मचारी करते हैं। यानी जो नौजवान इन क्षेत्रों में करियर बनाने की उम्मीद लिए बैठे हैं, उनके लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। ये बातें एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कही है।
इस अध्ययन रिपोर्ट को ‘श्रम बाजार पर एआई का प्रभावः नया पैमाना और आरंभिक साक्ष्य’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। हाई टेक क्षेत्र में बहुत से कार्यों को संपन्न कर देने की क्षमता के कारण एंथ्रोपिक का एआई मॉडल- क्लाउड- हाल में चर्चा में रहा है। हालांकि एंथ्रोपिक का कहना है कि फिलहाल उसका मॉडल पेशेवरकर्मियों के कार्यों का सिर्फ 33 फीसदी हिस्सा ही संपन्न करने में सक्षम हुआ है। इसके बावजूद इसके उपयोग से अनेक क्षेत्रों नौकरियां जाने लगी हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और कस्टमर सर्विस के क्षेत्र हुए हैं। आने वाले समय में मॉडल की क्षमता बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में मानव श्रम के लिए रोजगार के अवसर बेहद सिमट जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक एआई मॉडल्स से कंस्ट्रक्शन, कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, पर्सनल केयर आदि क्षेत्रों में रोजगार पर न्यूनतम असर पड़ेगा। मगर भारत जैसे देश के लिए भी ये सीमित राहत की ही बात है। इसलिए कि जिन क्षेत्रों को एआई मॉडल्स प्रभावित करने जा रहे हैं, उनमें बने रोजगार के अवसर ही गुजरे तीन दशकों में भारत में मध्य वर्ग के प्रसार का जरिया रहे हैं। रिपोर्ट में कहा है कि 22 से 25 वर्ष उम्र के जो छात्र अभी पढ़ कर निकले हैं, उनके लिए इन क्षेत्रों में अवसर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। यानी नौजवान आबादी के लिए मध्यवर्गीय जिंदगी का सपना लगातार दूर होते जाने की आशंका है। भारत के नीतिकारों को इसका आभास है, इसका संकेत पिछले साल नीति आयोग की एक रिपोर्ट से मिला था। मगर, उनके पास इसका ठोस एवं सार्थक समाधान भी है, ऐसा कोई संकेत उन्होंने नहीं दिया है।


