तकनीक का सियासी हथियार बनना

सामाजिक सशक्तिकरण के लिए जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी रेज के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे पहले कि नॉन स्टेट एक्टर्स यानी आतंकवादी संगठन या दूसरी आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इस तकनीक को हथियार बना कर समाज और देश के खिलाफ इस्तेमाल करने लगें उससे पहले इसे ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने अलगोरिदम की पारदर्शिता और तकनीक पर नियंत्रण के उपायों को लेकर चर्चा की। प्रधानमंत्री की बात दो तात्कालिक घटनाओं के संदर्भ में देखें तो पता चलेगा कि यह कितना बड़ा  खतरा बनता जा रहा है। मानवता की सबसे बेहतरीन सेवा के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है, उसे किस तरह से विध्वंस या निगेटिव एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का मामला नहीं है, बल्कि बिग डाटा एनालिसिस और अलगोरिदम आधारित जो भी तकनीक है वह कई तरह से इंसानों को और समाज को प्रभावित कर रही है। पहली घटना देश की वित्तीय राजधानी मुंबई की है। हिंदी फिल्मों के एक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्हें न्याय दिलाने का एक अभियान चला था। अब हाल में कई तरह की रिसर्च और खोजबीन के बाद पता चला है कि अकेले… Continue reading तकनीक का सियासी हथियार बनना

जरूरी और सामयिक कदम

इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कालेज अब केवल रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए ‘उभरते क्षेत्रों’ में ही में कोर्स शुरू कर सकते हैं। पुराने यानी पारंपरिक क्षेत्रों में ऐसा करने की इजाजत नहीं होगी। इस संबंध में जारी दिशा-निर्देश 2020-21 से शुरू होने जा रहे अकादमिक सेशन से लागू हो जाएंगे। ये कदम जरूरी माना जा रहा था। इंजीनियरिंग शिक्षा और ये क्षेत्र जिस तरह के संकट में फंस गया है, उसके बीच हर साल लाखों नए इंजीनियर तैयार करने का औचित्य अब नहीं रह गया है। इसके साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) फिर ज़ोर दिया है और वो ये है कि जाने-माने सरकारी इंस्टीट्यूट्स जैसे नाम नए कॉलेजों को न दिया जाये। साथ ही इंजीनियरिंग शिक्षा क्षेत्र में मांग से ज्यादा सप्लाई की समस्या पर भी विचार होना जरूरी है। देश में हर साल लगभग आधी सीटें खाली रह जा रही हैं। इसलिए कि इंजीनियरिंग का पेशा अब आकर्षक नहीं रह गया है। जबकि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कालेज गुजरे दशकों में खोले गए। शायद उतनी संख्या की आवश्यकता नहीं थी। इसीलिए हालिया दिशा-निर्देश में यह साफ कहा गया कि जो इंस्टीट्यूट ज्यादा छात्र लेना चाहते हैं या नए अतिरिक्त कोर्स शुरू करना चाहते हैं, तो उनको… Continue reading जरूरी और सामयिक कदम

एनएसई ने बीएफएसआई उद्योग के लिए लांच किया एनएसई नॉलेज हब

नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी एनएसई एकेडमी लिमिटेड (एनएएल) ने सोमवार को बीएफएसआई क्षेत्र की मदद के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित लर्निंग इको सिस्टम द एनएसई नॉलेज हब लॉन्च किया। इससे बीएफएसआई क्षेत्र के उद्योग को अपने कर्मचारियों का कौशल बढ़ाने और शैक्षणिक संस्थानों को वित्तीय सेवा उद्योग के लिए भविष्य की आवश्यकता अनुकूल प्रतिभा तैयार करने में मदद मिलेगी। एनएसई नॉलेज हब व्यक्तिगत जरुरत और सामुदायिक ज्ञान के माहौल लोगों को विश्वस्तरीय सामग्री पेश करेगा जिसमें सामग्री के संग्रहण, क्यूरेशन, निर्माण और लक्ष्य निर्धारण की सुविधा से यह सीखने वाले के अनुरूप और उसके द्वारा प्रेरित दोनों बन जाता है। यह ज्ञान मंच विभिन्न आंतरिक, वाह्य और उल्लेखनीय स्रोतों से इकठ्ठा सामग्री से लैस है और उपयोक्ताओं की ओर से ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया से और उन्नत बन जाता है। यह खबर भी पढ़ें:- एनएसई, बीएसई ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई एनएसई ने कहा कि नॉलेज हब विषय के जानकारों, क्यूरेटर और प्रशिक्षकों की पहचान करेंगे और जिम्मेदारी सौपेंगे जो मशीन द्वारा सामग्री को अंतिम स्वरुप प्रदान करेंगे इस तरह ज्ञान सामग्री सुग्राह्य बनेगी और उद्योग में पहली बार वीडियो लाइव स्ट्रीमिंग क्षमता… Continue reading एनएसई ने बीएफएसआई उद्योग के लिए लांच किया एनएसई नॉलेज हब

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरुरत: गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निवेशकों और स्टार्टअप्स को हरसंभव मदद का आश्वासन देते हुए आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में भारत को अभी और बहुत कुछ करने की जरुरत है।

पूनावाला फाइनेंस ने एक हजार करोड़ का एयूएम किया पार

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी पूनावाला फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड ने इस वर्ष नवंबर में 1000 करोड़ रुपए के एयूएम (संपदा प्रबंधन) को पार कर लिया है।

सभ्यताओं की कोडिंग और शिकार हिंदू!

तोजैसे लोग वैसी सभ्यता। जैसी सभ्यता वैसा व्यवहार। हर सभ्यता की एंथ्रोपोलॉजी अलग, मनोविज्ञान अलग, राजनीतिक संस्कृति अलग। शरीर भले एक सा बॉयोलॉजिक लेकिन आत्मा अलग-अलग। जैविक दिमाग एक लेकिन उसकी प्रोग्रामिंग, क़ोडिंग अलग-अलग।

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