सियाम के पलटने से सिर्फ उसकी ही संदिग्ध नहीं हुई है, बल्कि सरकार पर भी सवाल उठे हैं। सबसे प्रमुख प्रश्न है कि क्या सियाम पर सरकार ने दबाव डाला, जैसाकि आरोप लग रहे हैं?
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबिल मैनुफैक्चरर्स (सियाम) ने पहले सरकार को पत्र लिखकर शिकायत की कि ई-20 (20 प्रतिशत इथॉनोल मिले) पेट्रोल से कारें खराब हो रही हैं। लेकिन अब सियाम ने यह कहते हुए वो पत्र वापस ले लिया है कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले अभी और जानकारी की जरूरत है! ई-20 ईंधन को बड़ा सियासी मुद्दा बना चुके आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि कार कंपनियों के इस संगठन ने सरकार के दबाव में आकर पत्र वापस लिया। इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरे सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने सियाम के दोनों पत्रों में मौजूद ‘खतरनाक’ अंतर्विरोधों का उल्लेख करते हुए कहा है कि “दबाव में हुए” इस रुख परिवर्तन से भारतीय ऑटो उद्योग की प्रमुख संस्था की साख नष्ट हुई है।
अपने पहले पत्र में सियाम ने लिखा था- ‘कारों में क्लोराइड प्रेसर के कारण पाट-पुर्जों को बदलने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। ऐसा होने का संबंध ईंधन से पाया गया है।’ बहरहाल, अपने इस “ऑब्जर्वेशन” से भले सियाम पलट गया हो, लेकिन इससे ई-20 से वाहनों हो रहे नुकसान, वाहन मेनटेनेंस खर्च में बढ़ोतरी, और माइलेज घटने जैसे वाहन उपभोक्ताओं के अनुभवों पर शायद ही कोई फर्क पड़े। दरअसल, बुधवार को जब सियाम के पलटने की खबर आई, लगभग उसी समय दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टुअर ऑपरेटर एसोसिएशन के दर्जनों सदस्य राष्ट्रीय राजधानी में सड़क पर उतर कर ईंधन में मिलावट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
स्पष्टतः ये मुद्दा अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है, जिसे केंद्र दरकिनार नहीं कर सकता है। यह अफसोसनाक है कि उसने इस मामले में भी धुआंधार प्रचार से शिकायत पर परदा डालने और तथ्यों को छिपाने का नजरिया अपनाया है। मगर ऐसे तरीके अब कारगर होते नहीं दिखते। असल में सियाम के पलटने से सिर्फ उसकी ही संदिग्ध नहीं हुई है, बल्कि सरकार पर भी सवाल उठे हैं। सबसे प्रमुख प्रश्न है कि क्या सियाम पर सरकार ने दबाव डाला, जैसाकि आरोप लग रहे हैं? अगर ये संदेह मजबूत हुआ, तो उससे सरकार की साख में भी सेंध लगेगी।
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