nayaindia Kishan Andolan नाजुक मोड़ पर आंदोलन
Editorial

नाजुक मोड़ पर आंदोलन

ByNI Editorial,
Share
Farmer protest Kishan Andolan
Farmer protest Kishan Andolan

बेशक पुलिस ने अनुपात से अधिक और अनुचित बल-प्रयोग किया गया है। इससे किसानों में गुस्सा फैला है। मगर कुछ उग्रता नए गुट की रणनीति का भी हिस्सा है, जो संभवतः एसकेएम को अप्रभावी दिखाकर कृषक मुद्दों पर अपना नेतृत्व कायम करना चाहता है।

पंजाब-हरियाणा से लगे खनौरी बॉर्डर पर पुलिस कार्रवाई में एक नौजवान किसान की मौत ने किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के मौजूदा दौर को नाजुक मोड़ पर पहुंचा दिया है। यहां यह याद करने योग्य है कि 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ खड़ा हुए और 13 महीनों तक चले बहुचर्चित किसान आंदोलन के समय पुलिस कार्रवाई से कोई मौत नहीं हुई थी। तब आंदोलन चला रहे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व को इसका श्रेय दिया गया था कि उसने संयम और स्पष्ट रणनीति के साथ अपने अभियान का संचालन किया और आखिरकार जीत हासिल की। अब यही बात इस मोर्चे से अलग हुए संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व के लिए नहीं कही जा सकती। बेशक पुलिस की तरफ से भी अनुपात से अधिक और अनुचित बल-प्रयोग किया गया है। इससे भी ‘दिल्ली चलो’ अभियान में शामिल किसानों में गुस्सा फैला है। मगर कुछ उग्रता नए गुट की रणनीति का भी हिस्सा है, जो संभवतः एसकेएम को अप्रभावी दिखाकर कृषक मुद्दों पर अपना नेतृत्व स्थापित करना चाहता है। इस गुट ने किसानों की मांगों को तुरंत मनवा लेने की रणनीति अपनाई है।

यह भी पढ़ें: विपक्ष क्या भ्रष्टाचार का मुद्दा बना पाएगा?

मगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी करने वाले कानून और इस जैसी अन्य मांगों का देश की मौजूदा आर्थिकी से सीधा और तीखा अंतर्विरोध है। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि इन मांगों को मानने के लिए सरकार को तुरंत मजबूर कर देने की रणनीति में टकराव की गुंजाइश शामिल है। ऐसे में आंदोलन के नेतृत्व से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वह आंदोलन के तौर-तरीकों का स्पष्ट खाका लेकर चले और आंदोलन में शामिल लोगों पर नियंत्रण बनाए रखे। बुधवार को खनौरी बॉर्डर पर की घटना के बाद आंदोलन नेतृत्व ने ‘दिल्ली चलो’ अभियान को दो दिन रोकने का उचित फैसला किया। इस बीच सरकार से पांचवें दौर की वार्ता का भी प्रस्ताव आया है। सरकार के पास पिछली वार्ता से आगे अब किसानों के लिए क्या पेशकश है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा। ऐसे में अपेक्षित है कि आंदोलन नेतृत्व वार्ता में शामिल हो। उसके बाद की रणनीति वह तमाम परिस्थितियों पर समग्र विचार करने के बाद ही तैयार करे।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

  • कुछ सबक लीजिए

    जब आर्थिक अवसर सबके लिए घटते हैं, तो हाशिये पर के समुदाय उससे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए कि सीमित...

  • चाहिए विश्वसनीय समाधान

    चुनावों में विश्वसनीयता का मुद्दा सर्वोपरि है। इसे सुनिश्चित करने के लिए तमाम व्यावहारिक दिक्कतें स्वीकार की जा सकती हैं।...

Naya India स्क्रॉल करें