किसानों का मांग-पत्र
कहना कठिन है कि किसानों का संघर्ष कितना प्रभावी होगा। लेकिन यह साफ है कि किसान- मजदूर वर्गों में वर्तमान आर्थिक नीतियों के खिलाफ लामबंद होने की जरूरत का अहसास लगातार गहरा रहा है। किसान संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। गुजरे दस अगस्त को उन्होंने ‘जेल भरो’ मुहिम चलाई। अब वे सांसद और विधायकों सहित सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना मांग-पत्र सौंप रहे हैं। उनकी मांगों और घोषित रणनीति पर गौर करें, तो संकेत मिलता है कि अकेले लड़ाई लड़ने की अपर्याप्तता का उन्हें अहसास हुआ है। इसलिए उन्होंने अपने संघर्ष में खेतिहर और शहरी मजदूरों को शामिल...