केंद्र सरकार किसानों के साथ बातचीत का दिखावा कब तक करेगी? अब तो आंदोलन भी नहीं चल रहा है और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने भी किसानों से पल्ला झाड़ लिया है। पंजाब सरकार ने वह काम किया, जो केंद्र सरकार ने भी किसानों के साथ नहीं किया था। पंजाब पुलिस ने जोर जबरदस्ती किसानों को खदेड़ कर शंभू व खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन खत्म कराया और बड़ी संख्या में किसानों को हिरासत में भी लिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि आंदोलन खत्म हो गया और रास्ता खोल दिया गया है। उसी समय यह भी बताया गया कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भी अनशन खत्म कर दिया है। हालांकि हकीकत यह है कि डल्लेवाल का अनशन अब भी जारी है। सोचें, क्या सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने के लिए किसी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी? यह झूठ पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल ने बोला और केंद्र के कानूनी अधिकारियों ने भी हामी भरी।
बहरहाल, अब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान नेता डल्लेवाल से अनशन खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चार मई की बातचीत में हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। चार मई को आठवें दौर की वार्ता होगी। इससे पहले सातवें दौर की वार्ता 19 मार्च को हुई थी। सोचें, 19 मार्च की वार्ता में कोई हल नहीं निकला तो फिर डेढ़ महीने बाद की तारीख तय की गई। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि सरकार को कोई हल नहीं निकलना है लेकिन बातचीत का दिखावा भी करते रहना है। किसानों के साथ केंद्र की छठे दौर की वार्ता 22 फरवरी को हुई थी। इस तरह एक रैंडम तारीख चुन ली जाती है। 22 फरवरी, 19 मार्च, चार मई इस तरह सदियों तक बातचीत चलती रह सकती है। एक महीने, डेढ़ महीने में एक बार किसानों से बातचीत करने और उनकी मांगों को ठुकरा देने का काम तीन साल से ज्यादा समय से चल रहा है। दिल्ली को चारों तरफ से घेर कर बैठे किसानों का आंदोलन खत्म करने के लिए 21 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की थी और उनकी मांगें मानने का भरोसा दिया था। तब से किसानों के साथ वार्ता चल रही है।
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