महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सिखाने का अभियान चलाया है। इससे पहले 2017 में राज्य सरकार एक नियम ले आई थी कि मराठी नहीं बोलने वाले ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। उससे पहले और बाद में भी मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज ठाकरे जैसे छोटे मोटे नेता अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए मराठी भाषा के नाम पर ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों से मारपीट किया करते थे। लेकिन पहली बार राज्य सरकार व्यवस्थित तरीके से यह प्रयास कर रही है। पुलिस की सुरक्षा में सरकारी कर्मचारी ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को रोक कर मराठी का टेस्ट ले रहे हैं।
सरकार की ओर से बनाए गए नियम के मुताबिक टेस्ट में फेल होने पर उनको एक महीने का समय दिया जाएगा। अगर एक महीने में वे मराठी नहीं सीख पाते हैं तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टियों को इससे कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि चाहे एकनाथ शिंदे की शिव सेना हो या सुनेत्रा पवार की एनसीपी, दोनों को सिर्फ वही की राजनीति करनी है। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों को भी वही की राजनीति करनी है इसलिए सब चुप हैं। लेकिन भाजपा और कांग्रेस को तो पूरे देश की राजनीति करनी है! भाजपा की राज्य में सरकार है और सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के लोग महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी चलाने वाले हैं। अगर उनको परेशानी होती है तो इसका असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर होगा, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं। फिर भी भाजपा इस पर चुप्पी साधे हुए है।
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