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‘जेन जी’ के नौ करोड़ बच्चों की दुखद कहानी

अभिजीत दीपके या ‘जेन जी’ यानी 15 से 29 साल की उम्र का कोई युवा यह कहानी नहीं सुना रहा है। यह कहानी खुद भारत सरकार ने सुनाई है। बड़ी दुखद कहानी है। नीति आयोग ने ताजा सर्वेक्षण करा कर एक दस्तावेज तैयार कराया है, जिसमें बताया गया है कि 15 से 29 साल के युवाओं में करीब नौ करोड़ ऐसे हैं, जो कुछ नहीं कर रहे हैं। ध्यान रहे परिभाषा के मुताबिक 1997 से लेकर 2012 के बीच जन्म लेने वालों को ‘जेन जी’ कहा जाता है। इस लिहाज से यह आबादी इसी पीढ़ी की है, जो कुछ नहीं कर रही है।

कुछ नहीं करने का यह मतलब नहीं है कि कोई काम नहीं कर रही है। नीति आयोग के मुताबिक कुछ नहीं करने का मतलब है कि ये लोग पढ़ भी नहीं रहे हैं। भारत सरकार की संस्था नीति आयोग के मुताबिक देश के 8.7 करोड़ युवा, जिनकी उम्र 15 से 29 साल के बीच है वे न तो पढ़ रहे हैं, न कोई काम कर रहे हैं और न किसी कौशल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। सोचें, यह कितनी चिंताजनक बात है कि उनके पास काम तो नहीं ही है लेकिन भविष्य में किसी काम में लग जाने या कोई रोजगार शुरू कर लेने की संभावना भी नहीं है। वे स्कूल से बाहर हैं, कौशल विकास के किसी संस्था से नहीं जुड़े हैं और न कोई नौकरी या रोजगार कर रहे हैं। वे पूरी तरह से खाली बैठे हैं।

हो सकता है कि माता, पिता द्वारा खरीद कर दिया गया मोबाइल फोन उनके पास हो, जिस पर रील्स देखते हों। बड़ा सवाल है कि उनका भविष्य क्या है? और क्या ‘जेन जी’ तक आउटरीच की जो कोशिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दूसरे भाजपा नेताओं की ओर से की जा रही है उसके दायरे में ये युवा भी आते हैं? नीति आयोग ने उनके लिए जल्दी से जल्दी कोई कदम उठाने को कहा है ताकि उन्हें नौकरी या स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा सके। लेकिन इसकी संभावना कम दिख रही है। उलटे आने वाले दिनों में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ने का खतरा है।

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By NI Political Desk

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