क्या जेन-ज़ेड शांत मन से नहीं सोचती?
हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक महत्वपूर्ण बात कही। जिस दिन दोपहर में धर्मेद्र प्रधान को इस्तीफा हुआ उसकी सुबह हैदराबाद में ‘समकालीन मातृत्व’ के एक कार्यक्रम में कहा, “समाज में जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत स्वयं से कीजिए। सोशल मीडिया पर कम समय बिताइए। मोबाइल अनुशासन अपनाइए।” फिर उन्होंने जेन-ज़ेड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पीढ़ी “स्वभाव से भावुक है और बहुत शांत मन से नहीं सोचती।” पहली बात से असहमत होना कठिन है। मोबाइल अनुशासन आज सचमुच समय की आवश्यकता है। क्योंकि पिछले बारह वर्षों में भारत ने केवल...