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आया मतदान का मौका

विपक्षी खेमों में समझ बनी है कि मोदी सरकार ने देश की दिशा को बुनियादी तौर पर बदल देने की कोशिश की है। ऐसे में फिर से उसे जनादेश मिला, तो उसका मतलब मोदी के कार्यकाल में तय की गई दिशा पर जनता की मुहर होगी।

लोकसभा की 102 सीटों पर आज मतदान होगा। इसके साथ ही उस मैराथन प्रक्रिया का निर्णायक दौर शुरू हो गया है, जिसके नतीजे से, जैसाकि अनेक हलकों में राय है, इस देश का भविष्य तय होगा। वैसे तो लोकसभा का यह 18वां आम चुनाव है, लेकिन इसके बीच ऐसे मौके बहुत कम आए हैं, जब चुनाव परिणाण को देश की दशा-दिशा के लिए इतना निर्णायक समझा गया हो। संभवतः ऐसा एक मौका 1977 का आम चुनाव था। तब आंतरिक इमरजेंसी (1975-77) के तुरंत बाद चुनाव हुआ था।

अब देश के एक बड़े हलके- खासकर विपक्षी खेमे में- यह समझ बनी है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने राजनीति के ढर्रे और देश की दिशा को बुनियादी तौर पर बदल देने की कोशिश की है। ऐसे में फिर से उसे जनादेश मिला, तो उसका मतलब मोदी के कार्यकाल में तय की गई दिशा पर जनता की मुहर होगी। इसलिए माना जा रहा है कि आज से मतदाता जब मतदान करेंगे, तो देश के दीर्घकालिक भविष्य पर अपना निर्णय सुना रहे होंगे।

आज 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान होगा। साथ ही दो राज्यों- अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में मतदाता अपनी विधानसभाओं का चुनाव भी करेंगे। मतदान-पूर्व जनमत सर्वेक्षणों के हिसाब से तो इस मुकाबले में भाजपा की बढ़त इतनी ज्यादा है कि उसका सत्ता में लौटना तय मान लिया जाना चाहिए। लेकिन हाल में भाजपा के अपने मुख्य समर्थक वोट आधार में दरारें पड़ने के संकेत मिले हैँ।

इसके अलावा आम मतदाताओं के मन पर बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों के छाये रहने के संकेत की वजह से चुनाव के नतीजे को पहले से तय माना लेना भूल साबित हो सकती है। बेशक, विपक्षी इंडिया गठबंधन अपना कोई सकारात्मक कथानक पेश करने में विफल रहा है, जिससे भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन फायदे में नजर आता है। इसके बावजूद कई बार चुनाव परिणाम असंतुष्ट मतदाता खुद ही तय कर देते हैं, जैसाकि 1977 में भी हुआ था। मतदान का पहला चरण आते-आते इस बार भी ऐसा हो सकने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। नतीजतन, ठंडी शुरुआत के बावजूद चुनाव दिलचस्प मोड़ लेता दिख रहा है।

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