राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

एक कड़ा इम्तहान

चीन अमेरिका से सौदेबाजी करने में अपने को सक्षम साबित कर चुका है। इसलिए ध्यान इस पर है कि भारत इस चुनौती से कैसे उबरता है, जो अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति की जल्द ही कठिन परीक्षा होगी। अमेरिका के नए 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार के मद्देनजर क्या भारत रूस से रियायती तेल को छोड़कर वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ेगा? या कूटनीतिक संतुलन साधते हुए मौजूदा आपूर्ति शृंखला बनाए रखने की कोशिश करेगा? पहले विकल्प के साथ रूस से पारंपरिक रिश्तों में पेच खड़ा होने और देश की छवि खराब होने का जोखिम है। जबकि दूसरा विकल्प अपनाने का मतलब अमेरिका से संबंधों पर लगाए गए बड़े दांव पर पुनर्विचार करना होगा। दूसरे विकल्प से फ़ौरी नुकसान संभावित हैं, लेकिन इससे दीर्घकाल में स्वायत्त विदेश नीति को विकसित करने की संभावना भी बन सकती है।

गौरतलब है, अमेरिकी सीनेट ने “लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026” पारित कर दिया है। यह जल्द ही प्रतिनिधि सभा से भी पारित हो जाएगा। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। समझा गया है कि इस बिल के निशाने पर मुख्यतः भारत और चीन हैं। मगर चीन अमेरिका से सौदेबाजी करने में अपने को सक्षम साबित कर चुका है। इसलिए ध्यान इस पर टिका है कि भारत इस चुनौती से कैसे उबरता है। भारत कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 90 फीसदी हिस्सा आयात करता है। इसमें रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी तकरीबन 48 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अमेरिका का मकसद विश्व बाजार में रूसी तेल की पहुंच रोकना है, जिसका एक असर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल के रूप में देखने को मिलेगा।

ईरान युद्ध के कारण तेल पहले से महंगा है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 60 फीसदी बढ़कर लगभग 49.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। नया प्रतिबंध लागू होने पर भारत को पश्चिम एशियाई तेल की ओर रुख करना पड़ सकता है या फिर उसे अमेरिका या वेनेजुएला से आयात बढ़ाना होगा, जो काफी महंगा साबित होगा। इसीलिए यह मुद्दा भारत सरकार के सामने यक्ष प्रश्न बन कर खड़ा हो गया है।

Tags :

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment