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सबसे बड़ा रुपैया!

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण भारत के साथ बनी उसकी दुश्मनी क्रिकेट के सौदागरों के लिए रेवेन्यू का बड़ा जरिया बनी हुई है। इसी भावना को नकदी में तब्दील कर बोर्ड, खिलाड़ी, प्रायोजक, ब्रॉडकास्टर, मेजबान आदि सब मालामाल होते हैं।

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मैच नहीं होता, तो अनुमान है कि आईसीसी, प्रायोजकों, ब्रॉडकास्टर और मेजबान स्टेडियम आदि सबको मिलाकर ढाई से तीन हजार करोड़ रुपये तक का साझा नुकसान होता। यही वो आकंड़ा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद को पाकिस्तान की मान-मनौव्वल करने के लिए मजबूर कर दिया। यहां तक कि इस कोशिश में उसने भारत में वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार करने वाले बांग्लादेश पर कोई जुर्माना ना लगाने और मौजूदा वर्ल्ड में उसकी गैर-मौजूदगी की भरपाई के बतौर 2031 के पहले आईसीसी के एक बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी देने का एलान किया है।

हालांकि इसे सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया गया है, लेकिन संकेत हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड कुछ ‘शिकायतों’ को भी दूर करने का आश्वासन आईसीसी ने दिया है। उधर आर्थिक नुकसान का भय इतना था कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनूरा दिसानायके ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन कर कोलंबो में भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मैच में पाकिस्तान की टीम उतारने का अनुरोध किया। ये सारी मिज़ाजपुर्सियां भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की पूरी जानकारी में- यानी उसकी सहमति से हुईं। इस दौरान बीसीसीआई ने यह नहीं कहा कि आतंकवाद के प्रायोजक देश के साथ अब तो भारत कतई मैच नहीं खेलेगा, जब उसने राजनीतिक कारणों से भारत के साथ खेलने को इतना बड़ा मुद्दा बना दिया है।

आखिर हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का लोभ ऐसा है कि राष्ट्रवाद क्रिकेट के कारोबारियों के लिए दिखावा करने से ज्यादा का महत्त्व नहीं रखता! दरअसल, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण भारत के साथ बनी उसकी दुश्मनी क्रिकेट के सौदागरों के लिए रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया बनी हुई है। इसी भावना के कारण भारत और पाकिस्तान के मैच में दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमियों की भावनाओं का उबाल चरम पर होता है, जिसे नकदी में तब्दील कर बोर्ड, खिलाड़ी, प्रायोजक, ब्रॉडकास्टर, मेजबान आदि सब मालामाल होते हैं। उनकी ‘देशभक्ति’ मैच के दौरान हाथ ना मिलने या पाकिस्तानी अधिकारी से ट्रॉफी ना लेने जैसी क्रियाओं से आगे नहीं बढ़ पाती। तो ऐसे “राष्ट्रवाद” के प्रदर्शन का मंच एक बार फिर तैयार है।

By NI Editorial

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