पिछले महीने भारत यात्रा के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एलान किया था कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति जल्द ही नई दिल्ली जाएंगी और भारत वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पांच दिन की भारत यात्रा आई हैं। संभावना है कि उनकी इस यात्रा के दौरान भारत वेनेजुएला से कच्चे तेल की अधिक खरीदारी का सौदा करेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने के आखिर में भारत यात्रा के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस संबंध में एलान किया था। कहा था कि रोड्रिगेज जल्द ही नई दिल्ली जाएंगी और भारत वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा। इस घोषणा की पृष्ठभूमि गौरतलब है। पिछले तीन जनवरी को वेनेजुएला पर अचानक हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकलस मदुरो और उनकी पत्नी का अपहरण करने के बाद अमेरिका ने वहां के तेल भंडार पर अपना पूरा नियंत्रण बना लिया है।
अब अमेरिकी कंपनियां वहां तेल निकालने और बिक्री करने में जुटी हुई हैँ। इस बिक्री का पैसा भी अमेरिका के पास जाता है, जो उसमें से वेनेजुएला का हिस्सा अपनी मर्जी से तय कर उसके खजाने में भेज देता है। रोड्रिगेज वेनेजुएला में चाविस्मो (पूर्व राष्ट्रपति उगो चावेज की समर्थक विचारधारा) का प्रमुख चेहरा रही हैं। मगर तीन जनवरी की घटना के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका द्वारा वहां थोपी गई औपनिवेशिक किस्म की व्यवस्था में उन्होंने काम करना स्वीकार किया है। इस बारे में लैटिन अमेरिकी वामपंथी समूहों में अलग- अलग राय है।
एक सोच है कि ऐसा कर रोड्रिगेज आगे और हमलों और इस क्रम में चाविस्मो के सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह नष्ट हो जाने से बचा रही हैं। इसे एक तरह की समय काटने की रणनीति बताया गया है। मगर उनके आलोचकों की संख्या भी कम नहीं है। उधर यह भी कम विचित्र नहीं है कि भारत की तेल खरीद संबंधी फैसले अमेरिका ले रहा है। रूस के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदना भारत को महंगा पड़ रहा है। मगर डॉनल्ड ट्रंप के काल में अमेरिका से रिश्ता रखने के लिए ऐसी कीमतें चुकाने की अनिवार्य शर्त उसके सभी कथित सहयोगी देशों को चुकानी पड़ रही है। भले बात परेशान करने वाली हो, लेकिन यही सच है कि रोड्रिगेज की भारत यात्रा का एजेंडा वॉशिंगटन से तय हुआ है।


