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आयुष्मान ने बच्चों के सुरक्षित बचपन का किया आह्वान

Ayushmann Khurrana

यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर एवं अभिनेता आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना जिले का दौरा कर सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की तथा बच्चों के सुरक्षित और संरक्षित बचपन की आवश्यकता पर जोर दिया।यूनिसेफ समर्थित कार्यक्रम के तहत खुराना ने बच्चों, किशोरियों और समुदाय के सदस्यों से बातचीत कर यह समझने का प्रयास किया कि परिवार और समुदाय आधारित देखभाल किस प्रकार प्रवासी परिवारों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मनोसामाजिक सहयोग से जोड़ने में मदद कर रही है।

इस अवसर पर आयुष्मान खुराना ने कहा कि मजबूरी में किया जाने वाला सीजनल माइग्रेशन कई परिवारों की कठोर वास्तविकता है, लेकिन किसी भी बच्चे को अपनी परिस्थितियों के कारण अपना बचपन नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि जालना में उन्होंने देखा कि समुदाय मिलकर माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा कर रहे हैं और उन्हें परिवार, देखभाल तथा सहयोग से जोड़े रख रहे हैं। किनशिप केयर न केवल बच्चों को सुरक्षित घर उपलब्ध कराता है, बल्कि रिश्तों को बनाए रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बेहतर भविष्य की उम्मीद पैदा करने में भी मदद करता है।उन्होंने युवा कम्युनिटी लीडरों और बालमित्रों से भी मुलाकात की। 

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खुराना ने कहा कि बालमित्र बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के साथ बाल मजदूरी और बाल विवाह जैसे जोखिमों को रोकने में मदद करते हैं।

आयुष्मान खुराना ने कहा कि भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून हैं, जिनमें किशोर न्याय अधिनियम भी शामिल है, जिसने इस वर्ष दस वर्ष पूरे किए हैं। अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इन सुरक्षा उपायों का लाभ प्रत्येक बच्चे और परिवार तक पहुंचे, विशेषकर उन परिवारों तक जो सीजनल माइग्रेशन की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने 18 वर्षीय शिल्पा से भी मुलाकात की, जो पहले अपने परिवार के साथ प्रवास कर चुकी थीं। अब उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी कर व्यावसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है। खुराना ने कहा कि लड़कियों के सपने तभी पूरे हो सकते हैं जब बच्चे शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में बड़े हों।उन्होंने ऐसे परिवार से भी मुलाकात की, जो अपने दो छोटे पोते-पोतियों की देखभाल कर रहा है क्योंकि उनके पिता सीजनल काम के लिए प्रवास करते हैं। समुदाय और बालमित्रों के सहयोग से बच्चे स्कूल में बने हुए हैं तथा उन्हें पोषण और टीकाकरण जैसी सेवाएं मिल रही हैं।

Pic Credit : ANI

By Naya India

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