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लाडली बहना: अब आधी आबादी के दिलों में शिवराज…

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भोपाल। पांव – पांव वाले शिवराज सिंह चौहान राजनीति में नई हवा बनाने वाले युवा तुर्क मुख्यमंत्री बने तो कन्यादान योजना लाडली लक्ष्मी के साथ सूबे की सियासत में सबके दिमाग पर छा गए। अब जब उनके तरकश में सियासतदां नए तुणीर तलाश रहे थे तब उन्होंने रिटर्न गिफ्ट के तौर पर एक हजार रु हर महीने ‘लाडली बहना’ का ऐसा तीर चलाया जो आने वाले चुनाव में जीत का ब्रह्मास्त्र बन सकता है। यह रिटर्न गिफ्ट सरकार रिटर्न करा सकता है। 5 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन्मदिन भी मनाया गया और ऐसे मौके पर बेटियों के लिए लाडली लक्ष्मी और कन्या दान योजना के हर माह मई 2023 से बहनों के लिए एक हजार रुपए देने के एलान ने कई जगह विरोध झेल रहे भाजपाइयों खास तौर से विधायक और मंत्रियों को उत्साह से भर दिया। एक लीडर के तौर पर सीएम शिवराज सिंह ने अपनी भूमिका एक बार फिर जोरदार तरीके से निभा दी है लेकिन अभी भी पहरेदार और ओहदेदार भाजपा नेता विधायक और मंत्रियों ने अपना रवैया कार्यकर्ता और जनता फ्रेंडली नहीं किया तो चुनाव में रास्ता कांटों भरा ही होगा ऐसी भय मिश्रित आशंका से कोई इनकार नहीं कर सकता।

वर्ष 2003 दिसंबर में मध्य प्रदेश के राजनीतिक फलक पर दीदी उमा भारती की सरकार थी कुछ महीने बाद दादा बाबूलाल गौर की सरकार बनी यह भी कुछ महीने चल सकी इसके बाद शिवराज भैया की सरकार बनी। एक तरह से यह मुंबईया मसाला मूवी की तरह मध्य प्रदेश की कंप्लीट पॉलिटिकल पिक्चर वाली सरकार थी। दिन रात की कड़ी मेहनत भावनाओं से ओतप्रोत भाषण राजनीतिक प्रतिद्वंदी और कुछ अब तक सियासी शत्रुओं से सरलता सहजता संवाद करने वाले शिवराज सिंह चौहान सूबे की सत्ता में अपने केंद्रीय नेतृत्व का खुद को हनुमान साबित किया। इसके चलते राज्य की राजनीति में अंगद की भांति साढ़े अठ्ठारह साल जमे रहने का कीर्तिमान भी कायम कर डाला।

अभी और कितने रिकॉर्ड बनाएंगे शायद उन्हें भी नहीं पता क्योंकि जब चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तब कहा जा रहा था वे अपना चौथा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे और बीच में पार्टी कोई नया मुख्यमंत्री बनाएगी लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत मशक्कत के साथ केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया। अब यह साफ हो गया है कि 2023 के विधानसभा चुनाव बेटियों के मामा और बहनों की भैया के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। टीम कप्तान के तौर पर शिवराज सिंह चौहान अपना प्रदर्शन बेहतर करते जा रहे हैं लेकिन अच्छे नतीजे बेहतर प्रत्याशियों के चयन,संगठन की रणनीति और पार्टी के प्रति कार्यकर्ताओं की श्रद्धा भक्ति लौटना बड़ी चुनौती होगा।

भाजपा के भीतर इस बात की चर्चा बहुत जोरों पर है कि इस दफा कितने मंत्री और विधायकों के टिकट कटेंगे। संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है। लेकिन यह आंकड़ा हो सकता है कि एक दो महीने बाद अनुमान के तौर पर बाहर भी निकल कर आए लेकिन अभी तो 230 विधायक प्रत्याशियों में से करीब 80 ऐसे हैं जिनके टिकट कर सकते हैं विकास यात्रा के दौरान और सरकार को संगठन के साथ मिले फीडबैक से कुछ इस तरह के संकेत मिलते हैं। पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में खराब रिपोर्ट वाले मंत्री और विधायकों को संकेत समझाएं और चेतावनी देने की रस्में पूरी की जा रही है। इसके बाद उन्हें साफ तौर पर कह दिया जाएगा कि आपके टिकट काटे जा रहे हैं। बेहतर हो चुनाव ना लड़ने की घोषणा आप ही कर दें लेकिन इस तरह की सूचियां बनने तक पार्टी प्रभावित होने वाले नेताओं को मानसिक तौर पर इतना तैयार कर देगी कि वे इस पर सहमत हो जाए।

कांग्रेस में भी हुई बहनों की चिंता…
राज्य की करीब एक करोड़ बहनों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने जन्मदिन पर लाडली बहना योजना के लांच करने पर कॉन्ग्रेस चिंतित हो गई है। ‘बहना वोट हमें भी देना’ की तर्ज पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी लगे हाथ कह दिया कि वे सरकार में आए तो बहनों के लिए हर महीने डेढ़ हजार रुपए देंगे। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि मतदाताओं में आधी आबादी माने जाने वाली महिलाओं पर कांग्रेस की भी नजर बनी हुई है। कमलनाथ वोट पाने की नीतियों पर ध्यान दे रहे हैं तो वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर कार्यकर्ताओं के बीच में सक्रिय है। वे साफ तौर पर कह रहे हैं इस बार सभी ने कांग्रेस को पूरी ताकत से नहीं जिताया तो समझ लेना अगले चुनाव से घर बैठना पड़ेगा और जो लोग राजनीति में उनका कैरियर खत्म..! कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के साथ भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के संपर्क में भी हैं। कांग्रेस का मानना है भाजपा के दुखी- उपेक्षित नेताओं को अपने साथ लेकर चुनाव में एक बार फिर बाजी मार सकते हैं। अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व अपने असंतुष्टों को किस तरह समझाता बुझाता है।

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