दिल्ली उच्च न्यायालय महीने भर के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद बुधवार को फिर खुल जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान भी जून में अवकाशकालीन पीठ के ज़रिए काम जारी रखा था। एक जुलाई को फिर से खुलने के बाद उच्च न्यायालय कई अहम मामलों पर सुनवाई करेगा।
शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक और अन्य सभी आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 16 जुलाई को सुनवाई होगी।
इस मामले में पिछली सुनवाई मई में न्यायमूर्ति मनोज जैन ने की थी, जब सुनवाई को उन आप नेताओं की ओर से वकील की मौजूदगी का इंतज़ार करने के लिए टाल दिया गया था, जिनका कोई वकील मौजूद नहीं था। उससे पहले इन नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा सुनवाई का बहिष्कार किया था।
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उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ केजरीवाल और अन्य लोगों के खिलाफ न्यायमूर्ति शर्मा के बारे में सोशल मीडिया पर ‘अपमानजनक’ पोस्ट करने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए चार अगस्त को अवमानना मामले पर सुनवाई करेगी।
उच्च न्यायालय जुलाई में जयपुर पोलो ग्राउंड को हटाने के संबंध में इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका के साथ ही ‘‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम’’ में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एनएसयूआई की जनहित याचिका और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अपील पर सुनवाई करेगा जिसमें आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक के लिए मौत की सज़ा की मांग की गई है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए नया ‘रोस्टर’ एक जुलाई से लागू होगा।
उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान कई अहम मामलों पर सुनवाई की। 19 जून को पीठ ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के सरकार के फैसले को सही ठहराया।
Pic Credit : ANI
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