मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा है कि राज्य में सरकार कृषक कल्याण वर्ष नहीं बल्कि किसान उत्पीड़न वर्ष मना रही है।
दरअसल, राज्य की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष मनाने का ऐलान किया है, साथ ही किसानों के हित में अनेक फैसले लिए जाने के दावे किए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किया है, लेकिन सच्चाई यह है कि वह हर काम किसानों के ख़िलाफ़ ही करती है।
किसानों को मुआवजा न मिलने और एक मंत्री के कथित बयान का हवाला देते हुए कमलनाथ ने कहा है कि भिंड जिले में जिन किसानों की फसल ओलावृष्टि से बुरी तरह बर्बाद हो गई और मंत्री तक ने यह मान लिया कि किसानों को फसल का 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है, वहां भी सर्वे में 20 से 25 प्रतिशत नुकसान दिखाया जा रहा है ताकि किसानों को मुआवजा न देना पड़े।
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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि लगता है भारतीय जनता पार्टी के शब्दकोश में किसान कल्याण का अर्थ किसान उत्पीड़न हो गया है। इसलिए किसान कल्याण के नाम पर किसानों को न तो समय पर खाद-बीज मिलता है, न फसल की खरीदी सही समय पर शुरू होती है, न ही वादे के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता है और न ही उपार्जन की प्रक्रिया सही ढंग से चलाई जाती है।
कमलनाथ ने राज्य सरकार से मांग की है कि भिंड और प्रदेश की बाक़ी इलाकों में जहां भी किसानों की फसल ओलावृष्टि से बर्बाद हुई है, उन्हें अविलंब पूरा मुआवजा दिया जाए।
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