समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एथनॉल मिश्रित ईंधन की नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ‘एथनॉल’ मुनाफाखोरी का नया नाम बन गया है और यह सरकार, एथनॉल उत्पादकों तथा तेल कंपनियों की साझेदारी वाला मॉडल है।
श्री यादव ने सोमवार को एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि सरकार एथनॉल के समर्थन में प्रदूषण कम होने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटने जैसे तर्क देती है, लेकिन यह नहीं बताती कि इससे वाहनों की माइलेज कम होती है और उनके रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है।
उन्होंने दावा किया कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण वाहनों में स्टार्ट होने की समस्या बढ़ रही है, औसत कम मिलने से अधिक ईंधन की खपत होती है तथा वाहन जल्दी खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे वाहनों की पुनर्विक्रय कीमत और उनकी कुल आयु पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एथनॉल के कारण जंग लगने और इंजन में तकनीकी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका कहना था कि पुरानी गाड़ियों को एथनॉल मिश्रित ईंधन को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है, जिससे वाहन मालिकों को अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में बीमा कंपनियों को दावों के निस्तारण से बचने का एक और आधार मिल जाता है। अखिलेश यादव ने कहा कि महंगाई के दौर में आम लोग बड़ी मुश्किल से दोपहिया या चारपहिया वाहन खरीदते हैं और एथनॉल के कारण बढ़ने वाला रखरखाव का खर्च उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।
उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों से ईंधन तैयार करने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है तथा एथनॉल उत्पादन में अधिक पानी की खपत होने से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वह “चंद मुनाफाखोरों” के हित में आम जनता पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाल रही है।
Pic Credit : ANI
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