आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज़्यादातर लोग एक ही शिकायत करते हैं कि दिनभर सुस्ती बनी रहती है और काम में मन नहीं लगता। सुबह उठते ही थकान महसूस होती है, दिनभर शरीर भारी-भारी सा रहता है और ध्यान जल्दी भटक जाता है।
चाहे पढ़ाई हो, ऑफिस का काम हो या घर की जिम्मेदारियां, एकाग्रता की कमी हर किसी की परेशानी बन चुकी है। ऐसे में अगर कोई आसान और असरदार उपाय मिल जाए, तो उससे बेहतर क्या हो सकता है?
योग में ऐसी कई सरल क्रियाएं हैं जो बिना ज़्यादा मेहनत के शरीर और दिमाग दोनों को सक्रिय कर देती हैं। इन्हीं में से एक है कुंडलिनी शक्ति-विकासक क्रिया। यह क्रिया दिखने में भले ही बहुत साधारण लगे, लेकिन इसके फायदे कमाल के हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे करने के लिए न तो ज्यादा जगह चाहिए और न ही किसी खास उपकरण की जरूरत होती है।
इस योग क्रिया को करने से सुस्ती धीरे-धीरे दूर होने लगती है। पैरों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और शरीर में रक्त संचार तेज होता है। इसका सीधा असर हमारे ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। कुछ ही दिनों के अभ्यास से शरीर हल्का महसूस होने लगता है और सुबह-सुबह आलस कम हो जाता है।
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कुंडलिनी शक्ति-विकासक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। इस क्रिया को करते समय शरीर की गति और सांसों का तालमेल बनता है, जिससे दिमाग वर्तमान क्षण पर केंद्रित रहता है। यही वजह है कि इसे करने के बाद मन ज्यादा शांत और फोकस्ड महसूस करता है। जो लोग पढ़ाई करते हैं या मानसिक कार्य ज्यादा करते हैं, उनके लिए यह योग क्रिया खास तौर पर फायदेमंद मानी जाती है।
अगर आप रोजाना सिर्फ 5 मिनट इस योग क्रिया के लिए निकाल लें, तो कुछ ही समय में फर्क महसूस होने लगता है। शुरुआत में इसे 20-25 बार करना पर्याप्त होता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ने पर अपनी क्षमता के अनुसार इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। बेहतर परिणाम के लिए इसे सुबह खाली पेट या शाम को हल्के व्यायाम के रूप में किया जा सकता है।
इस क्रिया को करते समय ध्यान रखने वाली सबसे अहम बात यह है कि शरीर पर ज़ोर न डालें। शुरुआत में गति धीमी रखें और जैसे-जैसे अभ्यास बढ़े, वैसे-वैसे लय में तेजी लाएं। अगर घुटनों या पैरों में किसी तरह की समस्या हो, तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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