आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित खानपान, व्यायाम की कमी और लगातार तनाव के कारण पेट के जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में ‘पवनमुक्तासन’ लोगों के लिए प्राकृतिक उपाय बनकर उभरा है।
यह आसन न सिर्फ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है बल्कि पेट, जांघों और कमर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी मदद करता है। नियमित अभ्यास से शरीर हल्का और सक्रिय महसूस होता है।
‘पवनमुक्तासन’ नाम संस्कृत भाषा के तीन शब्दों से मिलकर बना है। ‘पवन’ का अर्थ ‘वायु’, ‘मुक्त’ का अर्थ छोड़ना और आसन का अर्थ मुद्रा है। यानी यह वह आसन है, जो शरीर की अंदरूनी वायु को मुक्त करने में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, पवनमुक्तासन पेट की गैस, कब्ज और पाचन संबंधी विकारों को दूर करने वाला एक अत्यंत प्रभावी योगासन है। यह पेट के अंगों की मालिश करता है, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और वात विकारों में राहत देता है। यह पीठ दर्द कम करने और पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक है।
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यह केवल पेट की समस्याओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह पेल्विक और प्रजनन अंगों की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है। मजबूत पेल्विक मसल्स महिलाओं में मासिक धर्म को नियमित रखने में मदद करते हैं और प्रजनन स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
इस आसन को करना बहुत आसान है और इसके लिए किसी भी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। आप अपने योग मैट या फर्श पर लेटकर अपने घुटनों को धीरे-धीरे सीने की तरफ लाते हैं और हाथों से उन्हें पकड़ लेते हैं। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहकर फिर धीरे-धीरे पैरों को जमीन पर छोड़ते हैं। इसे दिन में 2–3 बार करने से फर्क महसूस होने लगता है। इसे आप सुबह खाली पेट या शाम को हल्का भोजन करने के कुछ समय बाद कर सकती हैं।
गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप, हर्निया या हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो तो इस आसन को न करें।
Pic Credit : ANI
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