उज़्बेकिस्तान की मुबीना (15) ने सवाल किया कि हम सोते समय बोलते क्यों हैं? हर कोई सोता है, लेकिन नींद को लेकर बहुत कम लोग इसकी बारीकियों को समझते हैं। नींद मनोवैज्ञानिक के तौर पर काम करने वाले विशेषज्ञ माइकल आर. नाडोर्फ के मुताबिक, लोग जब उनके पेशे के बारे में सुनते हैं तो उनके मन में कई सवाल आते हैं। इनमें यह शामिल होता है कि ‘हमें सोने की जरूरत क्यों होती है, सपने क्यों आते हैं और क्या कुत्ते भी सपने देखते हैं?’ उनका जवाब है-हां, कुत्ते भी सपने देखते हैं।
कई बार लोग अपने उस भाई-बहन के बारे में बताते हैं, जिसके साथ वे कमरा साझा करते हैं और जो पूरी रात नींद में बड़बड़ाता रहता है। कुछ लोग खुद भी दोस्तों के साथ रात बिताने के दौरान सोते-सोते पूरी, लेकिन एकतरफा बातचीत करने के बाद मजाक का पात्र बन चुके होते हैं।
नाडोर्फ ने बताया कि उन्होंने करीब दो दशक तक नींद का अध्ययन किया है। उन्हें खास तौर पर ‘पैरासोमनिया’ में दिलचस्पी है। यह ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें नींद के दौरान शरीर कुछ गतिविधियां करता है या दिमाग कुछ अनुभवों से गुजरता है। इनमें बुरे सपने, नींद में चलना और नींद में बोलना शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर आम और पूरी तरह हानिरहित होते हैं। इन्हें तभी विकार माना जाता है, जब ये इतनी बार हों कि व्यक्ति के लिए वास्तविक समस्या पैदा करने लगें।
नींद एक ही अवस्था नहीं है। हर रात व्यक्ति नींद के कई चरणों से गुजरता है। करीब एक चौथाई नींद ‘आरईएम’ यानी ‘रैपिड आई मूवमेंट’ (आंखों की तेज गति) चरण में होती है। इसी दौरान ज्यादातर सपने, खासकर जीवंत सपने, आते हैं।
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‘नॉन-आरईएम’ नींद, जिसमें गहरी नींद की अवस्थाएं भी शामिल हैं, रात की कुल नींद का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा होती है। इस दौरान शरीर की गतिविधियां काफी धीमी हो जाती हैं, जिससे उसे आराम करने और खुद की मरम्मत करने का अवसर मिलता है।
डॉक्टर इन सभी चरणों को मिलाकर ‘स्लीप आर्किटेक्चर’ कहते हैं। ये चरण रात में लगभग हर 90 मिनट में चक्र के रूप में दोहराते हैं। सोने के तुरंत बाद नॉन-आरईएम नींद अधिक होती है, जबकि सुबह के शुरुआती घंटों में आरईएम नींद का हिस्सा बढ़ जाता है।
चूहों से लेकर बिल्लियों और हाथियों तक सभी स्तनधारी किसी न किसी रूप में सोते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद याददाश्त को मजबूत करने, बच्चों के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किशोरों को हर रात आठ से 10 घंटे सोने की सलाह दी जाती है। तीन से पांच साल के बच्चों के लिए 10 से 13 घंटे और छह से 12 साल के बच्चों के लिए नौ से 12 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है।
सोते हुए व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह बंद नहीं होता। रात के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से सक्रिय रहते हैं।
Pic Credit : UNI
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