जब भी शरीर किसी वायरल या बीमारी से संक्रमित होता है, तो डॉक्टर सबसे पहले आंखें और जीभ की जांच करता है लेकिन क्यों?
जीभ हमारे शरीर के स्वास्थ्य का आईना होती है, जो शरीर के भीतर चल रही गड़बड़ियों का संकेत देती है। आज हम आपको आयुर्वेद के अनुसार जीभ के बदलते रंग और शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विस्तार से बताएंगे, जिससे आप खुद जान पाएंगे कि सब कुछ ठीक है या नहीं।
कई लोगों की जीभ बहुत ज्यादा सफेद रहती है। यह कफ और आम दोष के बढ़ने का संकेत हैं। यह स्थिति तब आती है, जब खाना ठीक से पच नहीं पाता और शरीर में विषाक्त पदार्थ जमने लगते हैं। ऐसे में जीभ पर सफेद रंग की परत जमने लगती है। इससे बचने के लिए पाचन को दुरुस्त करना बहुत जरूरी है।
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हल्की लाल या गुलाबी जीभ। आयुर्वेद के अनुसार, हल्की लाल या गुलाबी जीभ पित्त दोष की वृद्धि का संकेत देती है। यह तब होता है जब शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और गैस और कब्ज की परेशानी होने लगती है। जीभ का हल्का लाल या गुलाबी रंग विटामिन बी-12 की कमी का भी संकेत हो सकता है। ऐसी परिस्थिति में शरीर में हमेशा कमजोरी बनी रहती है और एसिड का उत्पादन तेजी से होता है।
जीभ का हल्का पीला होना भी बीमारी का संकेत है। ऐसी स्थिति तब होती है, जब शरीर में पित्त और आम (टॉक्सिन) दोनों बढ़ने लगते हैं। यह मुख्य रूप से आंतों में जमा होते हैं और असर पूरे शरीर पर दिखता है। पीली जीभ यकृत पर बढ़ रहे भार को भी दिखाती है। अब लिवर अच्छे से हॉर्मोन का उत्पादन नहीं करता है, तब भी जीभ हल्की पीली हो जाती है।
जीभ का शुष्क होना शरीर में वात दोष की वृद्धि को दिखाता है, और उसके साथ ही यह रस धातु की कमी का भी कारण है। ऐसा होने पर बार-बार प्यास लगती है, लेकिन पानी भी जीभ के सूखेपन को कम नहीं कर पाता। इससे बचने के लिए ऑयल पुलिंग का सहारा लिया जा सकता है। इससे पूरे मुंह के अंदर नमी बने रहेगी।
Pic Credit : ANI
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