नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी ने अमेरिकी शेयर बाजार की नियामक एजेंसी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी की ओर से जारी नोटिस स्वीकार करने पर सहमति जताई है। वे वकील के जरिए नोटिस स्वीकार करेंगे और उनको 90 दिन का समय मिलेगा जवाब देने के लिए। गौरतलब है कि एसईसी ने 15 महीने पहले सिविल फ्रॉड का केस दर्ज किया था। 15 महीने के बाद गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी कानूनी नोटिस स्वीकार करने को तैयार हो गए हैं।
न्यूयॉर्क की एक अदालत में अडानी समूह की ओर से दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, अडानी के वकीलों ने अमेरिकी नियामक एजेंसी के दस्तावेज स्वीकार करने पर सहमति जताई है। इसके बाद अब जज को इस बात पर फैसला नहीं करना होगा कि अडानी परिवार को नोटिस कैसे भेजा जाए। यह मामला नवंबर 2024 का है, जब एसईसी ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेडको लेकर निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। इसमें करोड़ों रुपए रिश्वत दिए जाने का आरोप भी लगा है।
नोटिस स्वीकार होने के बाद अडानी समूह के पास अपना पक्ष रखने के लिए 90 दिन का समय होगा। खबरों के मुताबिक न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट में जमा दस्तावेजों के मुताबिक, अडानी और एसईसी के बीच एक सहमति पत्र पर दस्तखत हुआ है। गौरतलब है कि इससे पहले एसईसी ने कोर्ट से अपील की थी कि अडानी भारत में हैं और उन तक नोटिस नहीं पहुंच पा रहा है, इसलिए ईमेल या अन्य माध्यमों से नोटिस भेजने की इजाजत दी जाए। हालांकि, अब अडानी के वकीलों ने खुद नोटिस स्वीकार करने को कहा है, जिससे यह कानूनी अड़चन दूर हो गई है।
इस बीच अडानी ग्रीन एनर्जी ने बॉम्ब स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई को बताया है कि यह कदम केवल एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। कंपनी के मुताबिक, नोटिस स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने न्यूयॉर्क कोर्ट के क्षेत्राधिकार यानी ज्यूरिस्डिक्शन को मान लिया है। ग्रुप ने अपने सभी बचाव के अधिकार सुरक्षित रखे हैं और वे इस केस को खारिज करने की मांग करेंगे।


