नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम के जिस समझौते को फाइनल माना जा रहा था उस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंजूरी नहीं दी है। वे व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में थे और वहां उन्होंने समझौते का मसौदा देखा लेकिन उसे मंजूरी नहीं दी। इससे ईरान नाराज है। ईरान की ओर से कहा गया है कि ट्रंप ने एक बार फिर धोखा किया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई ने तीसरी बार विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘समुद्री नाकेबंदी जारी रखकर और बातचीत में जरूरत से ज्यादा मांगें रखकर ट्रंप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनका झुकाव बातचीत की तरफ नहीं है’। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप बातचीत के बजाय किसी दूसरे मकसद को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौते को लेकर धैर्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं और उनका मानना है कि कोई भी डील अच्छी डील होगी। सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान हेगसेथ ने कहा कि ट्रंप ऐसा समझौता चाहते हैं, जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने बताया कि, राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बनाता, तो सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम समझौते की खबर आई थी। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान को तीन सौ अरब डॉलर यानी करीब साढ़े 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया जा सकता है। साथ ही अमेरिकी कंपनियों को ईरान में निवेश की अनुमति भी मिल सकती है। ईरान की ओर से भी पुनर्निर्माण पैकेज की बात स्वीकार की गई थी। लेकिन ट्रंप ने इस समझौते को मंजूरी नहीं दी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देश परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते के करीब हैं। उन्होंने कहा कि, ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसके पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि फिलहाल परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं चल रही है।


