नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियां एक बार फिर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही हैं। म़ानसून सत्र में विपक्ष ने प्रयास किया था और उस समय विपक्ष के 87 सांसदों ने प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे। अब एक बार फिर शीतकालीन सत्र में विपक्ष इसी तरह की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि प्रस्ताव पर विपक्ष के 70 सांसदों ने दस्तखत किए हैं। इस बार प्रस्ताव के पीछे मुख्य रूप से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी शामिल हैं।
बहरहाल, राज्यसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे टकराव के बीच सोमवार को संसद भवन के परिसर में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर निशाना साधते हुए कहा- मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी इतना पक्षपाती सभापति नहीं देखा है। वे सत्ता पक्ष के सांसदों को नियम के विपरीत बोलने की छूट देते हैं, जबकि विपक्षी सांसदों को चुप कराते हैं।
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कांग्रेस के एक अन्य सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा- मैं केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहा हूं कि उन्होंने सदन को कमजोर किया है। मैंने आज तक नहीं देखा कि प्रश्नकाल में सरकार के सारे लोग खड़े हो जाएं और जवाब न आने दें। मेरा सवाल लगा हुआ था, लेकिन मुझे सवाल पूछने की इजाजत नहीं मिली। प्रमोद तिवारी ने आगे कहा- भाजपा सरकार अडानी के पैसे और भ्रष्टाचार में बराबर की भागीदार है। ये नहीं चाहती कि अडानी का नाम आए, इसलिए सदन को नहीं चलने दे रही।
इससे पहले शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसदों ने कांग्रेस की विदेशी फंडिग के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसिफिक संगठन और जॉर्ज सोरोस के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह फोरम जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करना चाहता है और इसे राजीव गांधी फाउंडेशन से आर्थिक मदद मिलती है। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि सरकार अडानी मामले से ध्यान भटकाना चाहती है, इसलिए कांग्रेस पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगा रही है।
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