नई दिल्ली। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बात पर हैरानी और नाराजगी जताई कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान दिए गए उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा कार्यवाही से बाहर कर दिया गया है। खड़गे ने कहा कि उन्होंने कोई असंसदीय बात नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है। उसे कैसे कार्यवाही से हटाया जा रहा है। उन्होंने अपने भाषण के अंश कार्यवाही में शामिल किए जाने की मांग की है।
खड़गे ने कहा कि चार फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी औचित्य के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। उन्होंने इस कदम को ‘लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ’ बताया। खड़गे ने कहा कि हटाए गए भाषण में सरकार की नीतियों की आलोचनाएं शामिल थीं, जिसे उन्होंने एक विपक्षी सदस्य के रूप में उजागर करना अपना कर्तव्य बताया। उन्होंने हटाए गए भाषण के हिस्सों को बहाल करने का भी आग्रह किया।
राज्यसभा में खड़गे ने कहा, ‘चार फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान मैं आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं। जब मैंने राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलोड किया गया वीडियो देखा, तो मैंने पाया कि मेरे भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिना किसी उचित स्पष्टीकरण या औचित्य के हटा दिया गया है’। उन्होंने कहा, ‘समीक्षा करने पर मैंने पाया कि हटाए गए हिस्से में संसद में वर्तमान सरकार के कामकाज पर मेरी टिप्पणियां और तथ्यात्मक संदर्भ शामिल थे। मैंने प्रधानमंत्री की कुछ नीतियों की आलोचना भी की, जो विपक्ष के सदस्य के रूप में मेरा कर्तव्य है, विशेषकर तब जब इन नीतियों का जनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता प्रतीत होता है’।


