नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ गया था, लेकिन सोमवार से स्थिति बदल सकती है। पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर अब दोनों सदनों में तीखी बहस का विषय बनेंगे। सत्तारूढ़ राजग (NDA) और विपक्ष आमने-सामने होंगे। विपक्ष सरकार को दो मुद्दों पर घेरना चाहता है — पहला, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में खुफिया विफलता का आरोप और दूसरा, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का हवाला जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में मध्यस्थता की बात कही थी।
राहुल गांधी सरकार की विदेश नीति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला। वे ट्रंप के बयानों को बार-बार उद्धृत करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सरकार का पक्ष रख सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हस्तक्षेप कर सकते हैं, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी सरकार की नीति और रिकॉर्ड को सामने रख सकें। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख नेता सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया था कि पहले सप्ताह में बहस नहीं हो सकी, लेकिन अब सोमवार को लोकसभा और मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा होगी। दोनों पक्षों ने 16–16 घंटे की बहस पर सहमति दी है।
राजग की ओर से उन सांसदों को भी चर्चा में उतारने की तैयारी है जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए 30 से अधिक देशों में गए थे। इनमें शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, जदयू के संजय झा और तेदेपा के हरीश बालयोगी शामिल हैं।
यह तय नहीं है कि शशि थरूर, जिन्होंने अमेरिका में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, विपक्ष की ओर से बोलेंगे या नहीं। उन्होंने हमले के बाद सरकार के रुख का समर्थन किया था जिससे पार्टी में मतभेद उभरे थे।
सरकार का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे स्वदेशी हथियारों की क्षमताओं का प्रमाण बताया है। चार दिन तक चले संघर्ष में भारत ने कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।
मोदी ने यह भी कहा है कि भारत अब आतंकवाद और उसके प्रायोजकों के बीच कोई भेद नहीं करता।
सत्र में गतिरोध का एक और कारण विपक्ष की यह मांग है कि बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण — एसआईआर (SIR) — पर भी संसद में चर्चा हो। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया चुनावी राज्य में भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए की जा रही है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है और केवल पात्र मतदाताओं को ही सूची में रखने के उद्देश्य से की जा रही है।
रीजीजू ने कहा है कि सभी मुद्दों पर एकसाथ चर्चा संभव नहीं है और एसआईआर पर बहस की मांग पर नियमों के तहत आगे फैसला लिया जाएगा।


