नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के पीरियड के दौरान पेड लीव देने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को खारिज किया। इसके साथ ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। यह कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा।
चीफ जस्टिस ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी’। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पीरियड में लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणामों के बारे में चिंता जाहिर की।
सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मामले को लेकर खुद कोई महिला कोर्ट में नहीं आई है। पीरियड के दौरान पेड लीव की याचिका लेकर शैलेंद्र मणि तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। पहली याचिका का निपटारा फरवरी 2023 में किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता को केंद्रीय महिला व बाल मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई थी। दूसरी याचिका निपटारा 2025 में किया गया।


