नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने हल्के फुल्के अंदाज में ही सही लेकिन यह माना है कि मुकदमों का समयबद्ध निपटारा करने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने माना है कि इससे वकीलों के साथ पंगा हो सकता है। असल में मुकदमों के समयबद्ध निपटारे का आदेश देने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में देश भर की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में स्थगन मांगने पर भी दिशा निर्देश बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
हालांकि इस दौरान अदालत ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, ‘हम वकीलों से दुश्मनी नहीं लेना चाहते। हम वकीलों के दोस्त हैं’। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी मोहन की बेंच में यह याचिका एक वकील की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता खुद कोर्ट में पेश हुए और कहा कि याचिका का मकसद अदालतों में अनियंत्रित स्थगन पर दिशा निर्देश तय कराना है।
याचिका में देश भर की सभी अदालतों के लिए एक समान राष्ट्रीय केस फ्लो मैनेजमेंट पॉलिसी तैयार करने और लागू करने की मांग भी की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इस नीति में मामलों की सुनवाई के अलग अलग चरणों के लिए तय समय सीमा हो। साथ ही स्थगन को नियंत्रित करने, उपयुक्त मामलों में लगातार और रोजाना सुनवाई कराने व लंबे समय से लंबित पुराने मामलों के प्राथमिकता के आधार पर निपटारे की व्यवस्था की जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन मांगों पर कोई दिशा निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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