नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ा कर भारत पर व्यापार संधि के लिए दबाव बनाने के बीच बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि भारत अपने किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री ने अमेरिका या उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा बहुत स्पष्ट था क्योंकि सबको पता है कि अमेरिका कृषि और डेयरी सेक्टर खोलने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एमएस स्वामीनाथन के शताब्दी समारोह से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा, ‘हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरे भाई बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा’। प्रधानमंत्री के इस बयान को बहुत अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं’। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बतौर प्रधानमंत्री उनको क्या व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ सकती है।
गौरतलब है कि अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर में अपनी शर्तों के साथ एंट्री चाहता है। कई दौरों की मीटिंग के बाद भारत इस पर तैयार नहीं है। तभी अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर गुरुवार, सात अगस्त से 25 फीसदी टैरिफ लगना शुरू हो गया। वहीं 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। इससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। उनकी मांग कम हो सकती है और वहां सस्ते टैरिफ वाले देशों से माल जाना शुरू हो सकता है।
असल में अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी उत्पाद दूध, पनीर, घी आदि और कृषि उत्पाद जैसे मक्का, सोयाबीन आदि को भारत में कम टैरिफ पर आयात की अनुमति मिले। अमेरिकी कंपनियां दावा करती हैं कि उनका दूध स्वच्छ और गुणवत्ता वाला है और भारतीय बाजार में सस्ता भी पड़ सकता है। लेकिन भारत खुद दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारत में आएंगे, तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।


