लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए जारी किए गए नियमों पर भले सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है और इसे सामाजिक विद्वेष फैलाने वाला माना है लेकिन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने इन नियमों का बचाव किया है। संघ प्रमुख ने मंगलवार को कहा कि यूजीसी के नियम किसी के खिलाफ नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के बनाए नियमों का सबको पालन करना चाहिए।
संघ प्रमुख ने हिंदुओं से तीन बच्चे पैदा करने को कहा और यह भी कहा कि इस देश के मुसलमान भी हिंदू हैं। उन्होंने मंगलवार को लखनऊ में कहा, ‘भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है। उनकी भी घर वापसी करानी है। लेकिन धीरे-धीरे यह काम होगा’। संघ प्रमुख ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर कहा, ‘एक परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। अभी जनसंख्या दर 2.1 है। यह कम से कम 3 होनी चाहिए। अब जो भी बच्चे शादी कर रहे हैं, उन्हें बताइए कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करें’।
मोहन भागवत ने यूजीसी की ओर से जारी नियमों का बचाव करते हुए कहा, ‘यूजीसी गाइडलाइंस किसी के खिलाफ नहीं है। सभी को साथ लेकर चलना होगा’। उन्होंने आगे कहा, ‘यदि एक व्यक्ति गड्ढे में गिरा हुआ है तो उसे बाहर निकलने के लिए हाथ उठाना होगा और बाहर खड़े व्यक्ति को उसे बाहर निकालने के लिए थोड़ा झुककर हाथ बढ़ाना होगा, जब दोनों हाथ बढ़ाएंगे तो ही बात बनेगी’। भागवत ने सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में सामाजिक सद्भाव बैठक में यूजीसी को लेकर कहा, ‘एक पक्ष को लगता है कि ये हमारे खिलाफ है। दूसरे पक्ष को लगता है कि हमारे साथ है। सरकार नियम बनाती है। यदि किसी को वह अच्छा नहीं लगता है तो अपनी बात रखनी चाहिए। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार जो भी कानून बनाए, उसका पालन करना चाहिए’।
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