नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन का काम संभालने वाली कंपनी आईपैक के कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के वहां पहुंचने और कथित तौर पर ईडी के कामकाज में बाधा डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता से नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई में कहा, ‘आपने वहां पहुंचकर ठीक नहीं किया। ऐसे असामान्य हालात में केंद्रीय एजेंसी को क्या करना चाहिए। अगर कल कोई और मुख्यमंत्री भी ऐसी छापेमारी में घुस जाए तो क्या ईडी के पास कोई समाधान नहीं होगा’।
सर्वोच्च अदालत में ईडी ने ममता बनर्जी के आईपैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के घर और कार्यालय से लैपटॉप, फोन और कई दस्तावेज ले जाने को सत्ता का गंभीर दुरुपयोग बताया है। एजेंसी ने मुख्यमंत्री और उनके साथ आए अधिकारियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने की मांग भी की है। गौरतलब है कि आठ जनवरी को ईडी की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन की कंपनी तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति बनाती है।
ईडी की कार्रवाई सुबह छह बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब साढ़े 11 बजे मामले ने तूल पकड़ लिया। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे आईपैक के ऑफिस भी गईं। उस समय ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया था और कहा था, ‘गृह मंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं’।
बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मुकदमा दर्ज करने की ईडी की मांग का विरोध किया और कहा, ‘किसी केंद्रीय सरकारी विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर करने की अनुमति देना संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा। सरकार ने कहा कि सीबीआई, एनसीबी, डीआरआई और एसएफआईओ जैसी जांच एजेंसियों को भी स्वतंत्र रूप से मुकदमा दायर करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। इसी तरह, राज्य स्तर की एजेंसियां सीआईडी, विजिलेंस आयोग और एंटी करप्शन ब्यूरो के पास भी ऐसे अधिकार नहीं होते।


