नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के आखिरी दिन सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं से एकजुट रहने को कहा। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, ‘हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए। दो संप्रदायों में बंटना नहीं चाहिए। वे हमारे मंदिर नहीं आ सकते, हम उनके मंदिर में नहीं जा सकते। यह सोच सही नहीं है। अगर कोई संप्रदाय अपने मंदिर को दूसरों के लिए नहीं खोलता, तो वह कमजोर हो जाएगा’।
इससे पहले सुनवाई के दौरान ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि एक संप्रदाय को दूसरे संप्रदाय के मंदिर में पूजा करने से रोका जा रहा है, जबकि वे वहां जाते भी नहीं। उन्होंने कहा था कि यदि वे जाना चाहें, तो क्या इसे सामाजिक सुधार के तहत सही ठहराया जा सकता है। अगर राज्य चाहे कि अन्य संप्रदायों के लोगों को भी अनुमति दी जाए, तो वह सुधार के रूप में कानून बना सकता है। उनकी इस टिप्पणी पर ही जस्टिस नागरत्ना ने एकजुट रहने की सलाह दी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में नौ जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले पर सुनवाई की है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। असल में केरल हाई कोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं यानी 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में रोक हटा दी थी। इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिस पर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन और केंद्र सरकार दोनों महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं।
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