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  • नफरत के नए-नए जुमले आ रहे है!

    कहते है जब से  देश में मोदी सरकार आई है, तब से देश में ‘असहिष्णुता’ बढ़ गई है। सच तो यह है कि भारत में 'घृणा' न तो मई 2014 से बढ़ी है और न ही इसका संबंध कुछ दशक पुराना है। इसकी जड़े सदियों पुरानी है। कालांतर में छल-बल से मतांतरण, नरसंहार, गोवा इंक्विज़िशन, भारत का रक्तरंजित विभाजन और कश्मीर का 1989-91 घटनाक्रम आदि इसके प्रमाण है। विडंबना है कि जो लोग ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलकर बैठे है, उनके गोदाम से घृणा के उत्पाद एक-एक करके बाहर आ रहे है। मंगलवार (5 दिसंबर) को आई.एन.डी.आई. गठबंधन के महत्वपूर्ण अंग...

  • धन्वंतरि जैसे ही थे वैद्य अश्विनी कुमार

    वैदिक तैंतीस देवताओं की सूची में अश्विनी कुमारों का नाम भी शामिल है। स्वामी दयानंद सरस्वती विरचित सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार ईश्वर एक है, और सिर्फ वही उपासनीय है। ऋग्वेद 1/164/ 39 के अनुसार जिसमें सब देवता स्थित हैं, वह जानने और उपासना करने योग्य ईश्वर है।...अश्विनि कुमारों को देवों का वैद्य कहा गया है। यहां देव का भावार्थ मनुष्य से है। अश्विनी कुमारों की क्षमता इतनी है कि च्यवन अर्थात वृद्ध को युवा बना दिया। प्राचीन भारत चिकित्सा के क्षेत्र में अत्यंत विकसित था। धन्वंतरि, सुश्रुत, चरक सदृश्य अनेक ऋषि- मुनियों ने चिकित्सा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान प्रदान...

  • संघ-परिवार: हिन्दुओं का बंटाधार

    संघ-भाजपा महापुरूषों ने उसी तबलीगी जमात के सरपरस्त को दो-दो बार राष्ट्रीय सम्मान देकर, तथा अन्य विविध संसाधन सहयोग देकर उस का हौसला बढ़ाया है। यह कैसी वीभत्स नीति है!अर्थात, हिन्दुओं की ही अन्य पार्टियों के प्रति विषैला दुष्प्रचार करना, और खुद जिहादी तत्वों को पुरस्कृत, संसाधित, उत्साहित करना। ऐसे लोगों को जो किसी भी तरह से गैर-मुस्लिमों का खात्मा ही अपना लक्ष्य मानते हैं। ... यह नजारा संघ-परिवार के बारे में सीताराम गोयल के अवलोकन की सिहरा देने वाली पुष्टि है।  कांग्रेस को हमास, बोको हराम, लश्कर-ए-तैयबा,  हिजबुल्ला, आइसिस, तालिबान जैसा बताकर 'हिन्दुओं सावधान' - इस आशय के मीम...

  • ‘सनातन’ रहेगा सनातन!

    बहस है ‘सनातन’ पर! सवाल है ‘सनातन’ के बहाने ‘हिंदू’ पर! भला ‘सनातन’ की परिभाषा क्या? कहा है इसका उद्गम? यह शब्द न तो वेद-उपनिषद् में है और न मनुस्मृति में। यह तो ब्राह्मणों का रूढ़िवाद है। उनकी बनाई कुरीतियों का कवच है। वह शब्द है, जिसका उन्नीसवीं सदी से पहले उपयोग नहीं था। तब यह सती प्रथा, बाल विवाह, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, जाति प्रथा आदि को सही बतलाने का जुमला था। इसलिए यह एक व्याधि है, बीमारी है। ऐसे ही ‘हिंदू’ क्या है? वेद-उपनिषद-पुराण, रामायण, महाभारत में कहीं ‘हिंदू’ नहीं लिखा है। ऐसा है क्या जो हिंदू धर्म कहलाए, उस...

  • हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ा

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • बार-बार ‘हिंदू-मुसलमान’ करने वाले कौन?

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • हम कितने-कैसे मूर्ख?

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • सांप्रदायिकता एक सोच है या रणनीति?

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • स्थायी तनाव से चुनावी फायदा

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • कांटों की पकी फसल

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • हम हिंदुओं का दिमाग!

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • हिंदू राष्ट्रवादी, टुकड़ा-टुकड़ा खेल!

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • कब तक चलाएंगे हिंदू बनाम मुसलमान?

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • जुलूसो की राजनीति की आड़ में धर्म के नाम पर हुड़दंग

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • हिंदुओं की भी किसे फिक्र?

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • चुनाव समाज के मुद्दों पर नहीं- बाबाओं के पाखंड के सहारे होंगे…?

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  • आगामी चुनावों को ‘पोलराइज’ करने के लिए सपा-भाजपा की मिलीभगत : मायावती

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

  • दिल्ली सत्ता है ही हिंदूओं की गुलामी के लिए!

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  • ताकि हिंदू मूल (मूल ढांचा) गंवा एनिमल फार्म की भेड़-बकरी बने!

    पिछले कुछ समय से सरकारी कामकाज में हिंदी और हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए तो तीनों विधेयकों का नाम हिंदी में रखा गया। दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं लेकिन सरकार हिंदी में बिल पास कराने पर अड़ी है। इसी तरह दक्षिण भारत से आने वाले एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण जैसे केंद्रीय मंत्री भी हिंदी में ही भाषण आदि दे रहे हैं। इसी तरह हिंदू प्रतीकों का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। एक प्रतीक को...

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