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  • बढ़ता अविश्वास बेहद खतरनाक

    चौतरफा अविश्वास बढ़ रहा है। नियम आधारित पुरानी विश्व व्यवस्था बिखर गई है। दुनिया के किसी भी देश को दूसरे देश पर या देशों के किसी भी समूह को दूसरे समूह पर भरोसा नहीं रह गया है। जब अमेरिका और यूरोप के बीच अविश्वास बढ़ गया तो बाकी देशों के बारे में क्या कहा जाए! इसी तरह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अविश्वास बढ़ रहा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश और उसके बाजार में आए उछाल से चलती दिख रही है। इसने सॉफ्टवेयर और आईटी आधारित सेवाओं के उद्योग को लगभग ध्वस्त कर दिया है। जब से एआई कंपनी...

  • असम में सिर्फ हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा

    असम में धीरे धीरे दूसरे सारे मुद्दे गौण होते जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार वहां 10 साल से है और इन 10 सालों में केंद्र में भी भाजपा की ही सरकार रही है। यानी 10 साल से डबल इंजन की सरकार चल रही है। लेकिन इस डबल इंजन सरकार के कामकाज की बजाय भाजपा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। भाजपा की जो चुनाव सामग्री तैयार की जा रही है उसमें सबका फोकस हिंदू-मुस्लिम के ऊपर है। एक प्रयोग के तौर पर पिछले दिनों एआई से बना एक वीडियो वायरल कराया...

  • वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

    देश इन दिनों सत्य-शोध की कोयला खदान है, जिससे यदा-कदा निकले चमकीले कण दिमाग़ और बुद्धि को खदबदा देते हैं। हाल में रक्षा बजट में एक लाख करोड़ रु. से अधिक बढ़ोतरी की खबर थी। भारत 2026–27 में 2.19 लाख करोड़ रु. के सैन्य उपकरण खरीदेगा। ऐसे ही यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से व्यापार समझौते की सुर्ख़ी है। मतलब जहाँ सैन्य क्षमताओं में बढ़ोतरी का क़दम, वहीं भारत की आर्थिकी का खुलना। कभी मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने लिखा है कि अब भारत विश्व की सर्वाधिक खुली आर्थिकी होने के क़गार...

  • हिंदू नेताओं का ‘राष्ट्रवाद’ मूढ़ अहंकार

    पूरी दुनिया भारत को हिंदू  देश जानती है। अगर वही अपने ही पड़ोस, अपने ही घर में, हिंदू विनाश पर चुप रहे -- तो क्रिश्चियन देशों को क्या पड़ी है कि बंगलादेश के हिंदुंओं के लिए हाथ-पैर चलाएं? यह हिंदू भारत की ऐसी डफरता है, जिस का विश्व में अन्य उदाहरण नहीं।... नाजी होलोकॉस्ट ने 60 लाख यहूदियों का खात्मा किया था, जबकि बंगलादेश में लगभग 5 करोड़ हिंदू खत्म हो चुके हैं – संहार और जबरन धर्मांतरण से।. तसलीमा के बाद अमेरिकी लेखक रिचर्ड बेंकिन ने अपनी पुस्तक "ए क्वाइट केस ऑफ एथनिक क्लीन्सिन्ग:  द मर्डर ऑफ बंगलादेश’ज हिन्दूज"...

  • बंगलादेश में नरसंहार का पैमाना सबसे बड़ा

    किसी समुदाय को हथियारों से मार डालने के अलावा उस के विरुद्ध ऐसी कानूनी, आर्थिक, सांस्कृतिक व्यवस्थाएं लादना भी नरसंहार है जिस से उस का क्रमशः नाश सुनिश्चित हो। यह बंगलादेश में दशकों से, सब के सामने हो रहा है। इस नरसंहार का पैमाना और रूप वर्तमान विश्व में अभूतपूर्व और सबसे बड़ा है। हिंदुस्तान में हिंदू संहार – 2 यहाँ तक कि कठिन बातों पर विचार करना भी उन का काम नहीं। हिंदू  नेता मनोहर बातों से भविष्य के सपने दिखाने में लगे रहते हैं। इसलिए भी, ताकि कश्मीर या बंगलादेश-बंगाल में जारी हिंदू  नरसंहार, जेनोसाइड से ध्यान हटा...

  • डफर दिमाग केवल गुमराह करता है!

    आखिर, हिंसा, अन्याय, उत्पीड़न रोकना ही स्वाभिमानी राजनीति का पहला काम है। स्टेट-पावर का काम है। जिस के साथ में सैन्य शक्ति समेत सभी शक्तियाँ होती हैं। जो सुरक्षा बलों को हुक्म देता है। किन्तु यह पावर अपने हाथ में लेने के बाद भी हिंदू  नेताओं की आम राजनीति केवल उपदेश, शेखी, परनिन्दा, रोटी एवं तमाशा (ब्रेड एंड सर्कस), बहानेबाजी, और कुर्सी साधे रखने की रही है। हिंदुस्तान में हिंदू संहार -1 बंगलादेश में हिंदुओं  की हत्याओं पर दुनिया निर्विकार है। क्योंकि भारत निर्विकार है। जब बंगलादेश में रोज हिंदुओं  की हत्या हो रही है, तो भारत के नेता राष्ट्रगान...

  • बांग्लादेश में चौथे हिंदू की हत्या

    ढाका। बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या कर दी गई है। पिछले 15 दिन में यह चौथी हत्या है। 50 साल के कारोबारी खोकन चंद्र दास पर 31 दिसंबर को धारदार हथियारों से हमला किया गया था। शनिवार को अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। खोकन दास पर शरियतपुर जिले के दामुद्या इलाके में केउरभांगा बाजार के पास हमला हुआ। उस समय वे अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि हमलावरों ने खोकन दास बुरी तरह पीटा, धारदार हथियार से हमला किया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी...

  • बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या

    ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या कर दी गई है। पिछले 12 दिन के अंदर बांग्लादेश में तीसरे हिंदू व्यक्ति की हत्या हुई है। तीसरी घटना भी मैमन सिंह जिले की है। गौरतलब है कि मैमन सिंह जिले में ही 18 दिसंबर को हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या की गई थी और पेड़ से लटका कर जला दिया गया था। बहरहाल, सोमवार, 29 दिसंबर को मैमन सिंह जिले की एक कपड़ा फैक्टरी के अंदर हिंदू कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना सोमवार शाम करीब सात बजे भालुका उपजिला की सुलताना स्वेटर्स लिमिटेड...

  • बांग्लादेश में पांच हिंदू घरों में आग लगाई

    ढाका। बांग्लादेश में दो हिंदू युवकों की हत्या के बाद अब हिंदू परिवारों के कम से कम पांच घरों में आग लगाने की घटना सामने आई है। यह घटना शनिवार, 27 दिसंबर को पिरोजपुर जिले के दम्रिताला गांव की बताई जा रही है। परिवार के सदस्यों के मुताबिक आग लगने के समय वे घर के अंदर फंसे हुए थे क्योंकि दरवाजे बाहर से बंद थे। इन परिवारों के कुल आठ लोग टिन और बांस की बाड़ काटकर बाहर निकलने में कामयाब रहे। लेकिन उनके घर, सामान और पालतू जानवर पूरी तरह जलकर राख हो गए। इस घटना में स्थानीय पुलिस...

  • 2025: हिंदू को हथकड़ी!

    आप भी सोचें, साल की कौन सी तस्वीर हम हिंदुओं के लिए सर्वाधिक शर्मनाक थी? मेरी स्मृति में हथकड़ी पहने हिंदुओं का अमेरिकी सैनिक विमान से उतरते हुए फोटो। फिर उस तस्वीर, वीडियो को आला अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दुनिया में प्रचारित करना। मगर मोदी सरकार के मुंह से आपत्ति, विरोध का एक शब्द भी नहीं! ऐसे में साल अंत में बांग्लादेश में हिंदुओं को मारने की ताजा घटनाओं पर क्या रोएं? 1947 से 2025 के हिंदू अनुभवों में दुनिया में कभी हिंदुओं को हथकड़ी पहना कर, जलील कर भारत लौटाने की घटना नहीं हुई। इसलिए आश्चर्य नहीं जो पड़ोसी पिद्दी...

  • भागवत ने हिंदुओं की मदद का आह्वान किया

    कोलकाता। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बांग्लादेश के हिंदुओं की मदद का आह्वान किया है। आरएसएस के एक सौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित संवाद के कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, इसलिए हालात मुश्किल हैं। उन्होंने कहा, ‘हिंदुओं को अगर बांग्लादेश में सुरक्षित रहना है तो एकजुट रहना होगा। दुनियाभर के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए’। मोहन भागवत ने कहा, ‘भारत को अपनी सीमाओं में रहकर जितनी हो सके उतनी मदद करनी चाहिए। हमें...

  • भारत को फिर चाहिए अपनी नैतिक ऊँचाई

    हिंदुओं को दुनिया भर में सम्मान उनके उदात्त मूल्यों—सहिष्णुता, अहिंसा और ज्ञान—के कारण मिला। उपनिषदों से गांधी तक का बौद्धिक व नैतिक सफर भारत की आत्मा का प्रतिनिधि रहा है। वही नैतिक ऊँचाई अब धुंधला गई है।... अंतरराष्ट्रीय मीडिया अब हिंदू धर्म को आक्रामकता के प्रतीक के रूप में चित्रित करता है। अगर हिंदू धर्म की नैतिक प्रतिष्ठा को बचाना है, तो उसे उत्पीड़न के तर्क से नहीं, अपने मूल्यों की पुनर्प्राप्ति से रास्ता निकालना होगा। पिछले दशक में भारत की इमेज पर नैतिक धुंध छाई है। वह भारत, जिसे प्रवासी भारतीय दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और बुद्धिमान नागरिकों...

  • हम बाँझ हो रहे हैं!

    पर सवाल यह है कि क्या हम बाँझ हो रहे हैं या हो चुके हैं? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि बाँझ होना आखिर है क्या? मेरा मानना है, बाँझपन को केवल स्त्री या पुरुष की संतान उत्पन्न करने की अक्षमता के अर्थ में नहीं, बल्कि बंजरता, अनुत्पादकता, नाकाबिलियत और असमर्थता के उस गहरे अर्थ-भाव में समझना चाहिए जहाँ जीवन केवल चलता है, पर कुछ रचता नहीं। हम इसकी प्रक्रिया में हैं! और ‘हम’ का अर्थ? हम हिंदू! हिंदू समाज, उसकी भीड़, उसका भविष्य! दिक्कत यह है कि भीड़ की भेड़चाल में हम कुल आबादी के उन आंकड़ों में जीते...

  • कांग्रेस की नासमझी, इतिहास छल शर्मनाक

    अभी कांग्रेस नेताओं का यह दावा सुनने को मिला कि द्वि-राष्ट्र सिद्धांत हिन्दू महासभा की देन है, और मुस्लिम लीग ने उसी को अपना लिया। सो, 1947 में देश-विभाजन का दोष हिन्दू महासभा पर है। इस दावे से न केवल इतिहास बल्कि राजनीति का भी अज्ञान दिखता है।... कांग्रेसी जिस हिन्दू महासभा को दोष दे रहे हैं, वह कांग्रेस से ही जुड़ी संस्था थी! हिन्दू महासभा के अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय कांग्रेस के भी चार बार अध्यक्ष रहे। लाला लाजपत राय भी दोनों संगठनों के महान नेता थे।... तभी अब कांग्रेस चरित्र-विहीन हो गई है। वह हिन्दुओं की पार्टी रहना...

  • हिंदू कभी चरित्रवान थे!

    पहले यह सोचें कि सवा अरब हिंदुओं में (बुज़ुर्गों को अलग रखना होगा) कौन-सी पीढ़ियां “चरित्रवान” शब्द का अर्थ जानती हैं? क्या है चरित्रवान होने की हिंदू परिभाषा? चरित्र के नैतिक नियमों का भला क्या केंद्र बिंदु है? गहराई से बूझें तो चरित्र और चरित्रवान होने की धुरी का पर्याय एक ही शब्द ‘सत्य’ है। उपनिषद् में चरित्र का सूत्र है—“ऋतस्य पथ”। अर्थात वह जीवन जो सत्यं (सत्य), धर्मं (धर्म), और दमः (आत्मसंयम) से संचालित हो। इन तीनों में मनुष्य का व्यवहार और आचरण बना हुआ हो। वह “मनसा, वाचा, कर्मणा”— याकि दिल-दिमाग, बोलने-लिखने और व्यवहार— सत्य, धर्म और आत्मसंयम...

  • विचार मुकाबिल हो, तो तोप चलाओ?

    जिहाद इंच-इंच बढ़ रहा है। शान्ति और सहजता से। काफिरों के सहयोग से। क्योंकि काफिर एक विचार को तोप या रिश्वत से खत्म करने की जुगत में है। अपने प्रोपेगंडा पर खुद फिदा!  अतः जिहाद देश के सैकड़ों छोटे-छोटे इलाके प्रायः नि:शब्द रूप से धीरे-धीरे कब्जे में कर रहा है। यह सौ साल से अविराम जारी है। आगे अल्लाह जानता है! दो पाकिस्तानी थे: अली भाई तहला और आसिफ फौजी, तथा दो हिन्दुस्तानी: आदिल हुसैन थोकर और अहसान।  सरगना शायद हिन्दुस्तानी थोकर ही था। एक एक नाम और मिलते हैं: पाकिस्तानी हाशिम मूसा और हिन्दुस्तानी आसिफ अहमद शेख। यही चार...

  • जाति नहीं अब धर्म का मामला

    पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हिंदू-मुस्लिम का जो राग छेड़ा और उसके बाद जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान के आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर हिंदुओं का जैसा नरसंहार किया उससे भारत की राजनीति बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती है। भारत में पिछले  कुछ समय से राजनीति बदली थी। लोकसभा चुनाव में संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई कारगर साबित हुई थी। भाजपा की मंदिर और धर्म के एजेंडे के बरक्स विपक्षी पार्टियों ने अपना गठबंधन बनाया था और अपना एजेंडा आगे किया था। वह एजेंडा धर्म की राजनीति को फेल करने वाला था। उसमें जाति...

  • पाकिस्तान तो चाहता है हिंदू-मुस्लिम हो

    विरोध कश्मीर में भी हो रहा है। मस्जिदों से आतंकवादियों की मजम्मत (भर्त्सना) की जा रही है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। खून देने के लिए अस्पतालों में लाइनें लग गईं। महबूबा मुफ्ती मीर वाइज फारुक उमर ने बंद का काल दिया। यह होना चाहिए। सही है। मगर शेष भारत में जाति, धर्म, हिन्दु मुस्लिम, राजनीति के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पहलगाम की आतंकवादी घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। 36 साल के आतंकवादी दौर में टुरिस्टों पर इतना बड़ा हमला पहले कभी नहीं हुआ। सही यह है कि टुरिस्ट,...

  • बंगाल से दिल्ली तक हिंदू खतरे में है!

    एक पुराना शेर है ‘मरीज ए इश्क पे रहमत खुदा की, मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की’। हिंदुओं पर बढ़ते खतरे के लिहाज से यह शेर बहुत सटीक बैठता है। 11 साल पहले भारत में हिंदुओं को मजबूत करने वाली सरकार बनी। उससे पहले इस्लाम के खतरे में होने का जुमला सुनाई देता था। लेकिन अब पिछले 11 साल से देश में और देश के बाहर दुनिया भर में हिंदुओं के खतरे में होने या हिंदुओं पर खतरा बढ़ने का जुमला सुनाई दे रहा है। चारों तरफ हिंदू खतरे में हैं। पश्चिम बंगाल में बड़ा खतरा है तो असम...

  • तुम्हारे पास ‘विकल्प नहीं है चुपचाप साथ रहो !’

    'स्यूडो-सेक्यूलरिज्म' को दशकों से कोस-कोस कर जिन नेताओं ने अपनी जमीन फैलाई थी - सत्ता में आने के बाद वे हिन्दू समाज को तरह-तरह के ताने और नसीहतें बेधड़क देते रहते हैं। हिन्दू धर्म, मंदिर, देवी देवताओं, और‌ शास्त्रों पर भी अपनी लनतरानियाँ सुनाते हैं। वे यह सब इस तरह करते, बोलते हैं जैसे कि वे स्वयं हिन्दू समाज के अंग नहीं हैं! उस से अलग और ऊपर हैं। तब हिंदुओं को उन्हे खरी-खोटी सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। तब वे बेधड़क कहते हैं कि 'हम ने हिन्दुओं का ठेका नहीं ले रखा!' हिन्दू पीड़ा का कारोबार – 2...

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