मुंबई। हिंदी विरोध को लेकर उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने सफाई दी है। उनकी पार्टी ने कहा है कि उनका हिंदी से कोई विरोध नहीं है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने कहा है कि तमिलनाडु में हिंदी का विरोध है लेकिन उनकी पार्टी हिंदी विरोधी नहीं है। इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पांच जुलाई को मुंबई में हुई ‘मराठी विजय रैली’ की तारीफ करते हुए कहा था कि हिंदी विरोध का आंदोलन तमिलनाडु से महाराष्ट्र पहुंच गया है। उन्होंने हिंदी विरोधी लड़ाई में शामिल होने के लिए उद्धव व राज ठाकरे को बधाई दी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा एक से पांच तक हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाना अनिवार्य किया था। हालांकि बाद में इस फैसले को रद्द कर दिया गया।
इस पर उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने रविवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं है। पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा, ‘तमिलनाडु में जो हिंदी विरोध है, उसमें वे न हिंदी बोलते हैं और न दूसरों को बोलने देते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में हमारा ऐसा कोई रुख नहीं है। हम हिंदी बोलते हैं, यहां हिंदी फिल्में, थिएटर और संगीत भी है। हमारी लड़ाई सिर्फ प्राथमिक शिक्षा में हिंदी थोपने के खिलाफ है’। राउत ने कहा, ‘डीएमके नेता एमके स्टालिन को उनके संघर्ष के लिए शुभकामनाएं, लेकिन हमारी सीमाएं स्पष्ट हैं’।