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कौन बनेगा मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री

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भोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब यक्ष प्रश्न यही है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा और क्या उत्तर प्रदेश की तर्ज पर इस बार प्रदेश में उपमुख्यमंत्री भी बनाए जाएंगे क्योंकि आधा दर्जन दावेदार इन पदों के लिए माने जा रहे हैं, तो वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन जिस तरह से भाजपा ने इस बार फिर भाजपा फिर शिवराज के नारे की जगह फिर इस बार भाजपा सरकार का नारा दिया है और जो उसके पोस्टर थे जो वीडियो रथ घुमाए गए उनमें भी सामूहिक नेतृत्व के बल पर चुनाव लड़ने की कोशिश भाजपा ने की और तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को चुनाव मैदान उतारा रहा। जिनमें से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद गणेश सिंह चुनाव हार गए लेकिन कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर, पहलाद पटेल, राकेश सिंह, रीति पाठक, उदय प्रताप सिंह, चुनाव जीतने में सफल हुए हैं और अब इनमें से अधिकांश मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।

इसके साथ ही प्रदेश मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य और लगातार नौवीं बार रहली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते गोपाल भार्गव के क्षेत्र में भी उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चा रही और शायद इसी कारण वह लगभग 72000 वोटो से भी ज्यादा से चुनाव जीते। इतने अधिक दावेदारों के कारण ही अब भाजपा में यह चर्चा चल पड़ी है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तीन उपमुख्यमंत्री भी बनाए जा सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी दावेदारों में शामिल है लेकिन जिस तरह से भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व पिछले कुछ वर्षों में चौंकाने वाले नाम मुख्यमंत्री पद पर लेकर आते रहा है उसके कारण कोई भी कहने की स्थिति में नहीं है कि आखिर मध्यप्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सबके अपने-अपने कारण है लेकिन मोदी के मन में कौन है अमित शाह की रणनीति में कौन फिट बैठता है इसका खुलासा तो राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा लेकिन फिलहाल भोपाल से लेकर दिल्ली तक मेल मुलाकात का दौर तेज हो गया है। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास में जहां प्रदेश के विधायक और मंत्री मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं। वही केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल की सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से हुई। मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी दिल्ली पहुंच गए हैं क्योंकि सोमवार से लोकसभा का सत्र शुरू हो गया है। इस कारण सभी सांसद दिल्ली पहुंच गए हैं। वहीं भाजपा के विधायक जीत का प्रमाण पत्र लेकर राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं।

बहरहाल, भाजपा ने पांचो राज्यों में कोई भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था बल्कि मोदी के चेहरे को आगे करके चुनाव लड़ा और तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारी जीत के बाद अब भाजपा का सबसे बड़ा मिशन इन राज्यों में मुख्यमंत्री चयन को लेकर है जिसको लेकर पार्टी इन राज्यों में पर्यवेक्षक भेजेगा। इसके पहले आज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की बैठक है और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व लगभग उन नामों को तय कर लेगा जो उनको इन राज्यों में मुख्यमंत्री बनना है। पार्टी जहां लो प्रोफाइल और आम जनता में स्वच्छ छवि के नेता को मुख्यमंत्री बनाने के फार्मूले का उपयोग करती आई है शायद इसी कारण दावेदारों की उम्मीदें बड़ी हुई है हो सकता है उनका भी नंबर लग जाए और दावेदारों की ज्यादा संख्या को देखते हुए पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर दो या तीन उपमुख्यमंत्री बनाने का भी निर्णय ले सकती है जिसमें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी साधा जाएगा।

कुल मिलाकर भाजपा में जहां जीत के कारणों की चर्चा हो रही है क्योंकि बंपर जीत में कोई एक कारण नहीं बल्कि कई कारण हैं जिन जन कल्याण, गरीब कल्याण, लाडली बहना, मोदी की गारंटी तो शामिल है ही मेरा बूथ सबसे मजबूत, बूथ विस्तारक अभियान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। 51% वोट शेयर के लक्ष्य को पीछा करते हुए भाजपा ने 101 विधानसभा क्षेत्र में 50% से ज्यादा 32 विधानसभा क्षेत्र में 45 से 50% के बीच और 18 विधानसभा क्षेत्र में 40 से 45% के बीच वोट शेयर प्राप्त किया। जाहिर है पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों का चयन कुछ इस तरह से करेगा जिससे यह वोट शेयर लोकसभा चुनाव में और भी बढ़ाया जा सके।

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