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तो दुनिया में भारत के आंकड़ों को ‘सी’ग्रेड

यह भी दुनिया देख रही है। अब तक दुनिया की संस्थाएं भारत के आंकड़ों पर संदेह जताती थीं। विकास के आंकड़ों से लेकर गरीबी, प्रदूषण, शौचालय आदि के तमाम आंकड़े संदेह के घेरे में थे। कहा जा रहा था कि भारत आंकड़ों में गड़बड़ी करता है। लेकिन अब तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने भारत के आंकड़ों को ‘सी’ ग्रेड ही दे दिया है। यह दूसरी सबसे खराब रेटिंग होती है। आईएमएफ ने नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स को ‘सी’ ग्रेड दिया है, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी और ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी जीवीए शामिल है।

सोचें, ये दोनों सबसे अहम आंकड़े होते हैं। इनको लेकर आईएमएफ ने कहा है कि ‘सी’ ग्रेड का मतलब है कि इन आंकड़ों में कुछ ‘शॉर्टकमिंग’ यानी कमी है, जिससे निगरानी की व्यवस्था प्रभावित होती है। आईएमएफ ने यह रेटिंग गुरुवार को जारी की और उसके एक दिन बाद ही भारत सरकार ने दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के आंकड़े जारी किए।

बहरहाल, भारत के सालान इकोनॉमिक फ्रेमवर्क को लेकर आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें नेशनल अकाउंट्स डाटा को ‘सी’ ग्रेड दिया गया है। वैसे ओवरऑल डाटा कैटेगरी को ‘ब’ ग्रेड मिला है। यानी भारत के आंकड़ों की गुणवत्ता और उनकी विश्वसनीयता या तो दोयम दर्जे की है या तीसरे दर्जे की है। आईएमएफ ने भारत की आर्थिक गणना का बेस ईयर 2011-12 होने पर भी सवाल उठाया है और इसे आउटडेटेड कहा है। इसके अलावा कई और कमियां रिपोर्ट में बताई गई हैं। जाहिर है पूरी दुनिया में इस रिपोर्ट को देखा होगा। पहले से भारत के आंकड़े पर जो संदेह किया जाता है उसकी पुष्टि इससे होती है। इससे भारत का वैश्विक व्यापारिक संबंध प्रभावित होगा और विकास को लेकर किए जा रहे दावे भी प्रभावित होंगे।

ध्यान रहे भारत इस समय दुनिया के कई देशों के साथ व्यापार संधि करने के दौर में है। कई देशों के साथ व्यापार वार्ता चल रही है। अमेरिका के साथ व्यापार संधि की वार्ता चल रही है लेकिन बार बार इस पर ग्रहण लग रहा है। संभवतः इसी वजह से आईएमएफ ने यह भी कहा है कि अमेरिका की ओर से भारत के ऊपर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ स्थायी रूप से रहेगा। हालांकि भारत ने इसका विरोध किया है। लेकिन मुंहजबानी विरोध का कोई अर्थ नहीं है। अमेरिका के साथ तो व्यापार संधि नहीं ही हो रही है यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार संधि की वार्ता किसी मंजिल तक नहीं पहुंच रही है।

हालांकि भारत ने यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए  के साथ एक संधि की है। परंतु वह व्यापार व आर्थिक साझीदारी का समझौता यानी टीईपीए है। यूरोपीय संघ के साथ भारत की मुक्त व्यापार संधि यानी एफटीए की वार्ता काफी समय से चल रही है। सोचें, जब से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर शुरू किया है तब से दुनिया के अनेक देशों ने व्यापार संधि कर ली है। चीन की भी व्यापार संधि अमेरिका के साथ हो गई है। लेकिन भारत की संधि न तो अमेरिका से हो रही है और यूरोपीय संघ के साथ हो रही है।

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By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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