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हवाईअड्डों पर अफरातफरी, उड़ानों का संकट

देश के हवाईअड्डों पर कई दिनों से अफरातफरी है। एक कारण इंडिगो का संकट है। सस्ती सेवा के नाम पर मनमानी कीमत वसूलने वाली इस कंपनी ने जरुरत से बेहद कम पायलट रखे और जब नागरिक विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने पायलट व दूसरे चालक दल के सदस्यों के कामकाज की शर्तों में बदलाव किया तब भी कंपनी ने पायलटों की संख्या बढ़ाने की जरुरत नहीं समझी। इस मनमाने रवैए के कारण पिछले दिन में उसकी करीब एक हजार उड़ानें रद्द हुई हैं। कंपनी प्रबंधन का अहंकार ऐसा है कि उसने यात्रियों को समय से पहले सूचना देने की भी जरुरत नहीं समझी। खबर है कि पांच घंटे तक विमान में बैठाने के बाद उड़ान रद्द की गई। ऐसा नहीं है कि एक नवंबर से नियम लागू होने के बाद इंडिगो की सेवा बिगड़ी है। पिछले एक साल में उसकी आधी से ज्यादा उड़ानों में देरी हुई है।

लेकिन इंडिगो की समस्या के अलावा और भी कारण हैं, जिनसे भारत के हवाईअड्डों पर अफरातफरी मची। कुछ दिन पहले ही एयरबस ए320 के सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के कारण दो दिन तक संकट रहा। भारत में तीन सौ से ज्यादा विमान इस श्रेणी के हैं, जिनको अपग्रेड करने की वजह से उड़ानें स्थगित की गईं। उससे पहले डाटा स्फूपिंग की शिकायत मिली थी। कम से कम सात उड़ानों में ऐसा हुआ कि कॉकपिट में बैठे पायलट को रनवे की जगह दूसरी चीज दिखाई देने लगी। एक पायलट को रनवे दिख रहा था और लैंडिंग से ठीक पहले उसे वहां खेत दिखाई देने लगे। सोचें, अगर ऐसा हो जाए कि कहीं खेत की जगह पायलट को रनवे दिखाई दे और वह वहां लैंडिंग कराने लगे तो क्या होगा?

यह वास्तविक खतरा है। डाटा स्फूपिंग एक तरह का साइबर हमला है, जिसमें हैकर एयरलाइंस के नेटवर्क को या एटीसी के नेटवर्क को हैक कर सकते हैं। कुछ समय पहले खाड़ी देशों के ऊपर से खासतौर पर ईरान और उसके आसपास के देशों के ऊपर से उड़ते हुए विमानों के पायलटों ने डाटा स्फूपिंग की शिकायत की थी। लेकिन अब यह भारत के घरेलू उड़ानों में होने लगा है। यह बड़ी चिंता का कारण है। अगर तकनीकी कारण नहीं हों तब भी कोहरे के कारण विमानों के परिचालन में देरी होगी और सर्दियों में हवाईअड्डों पर अफरातफरी मची रहेगी। कोहरे में लैंडिंग की तकनीक आ जाने की बातें कई सालों से हो रही हैं लेकिन हर साल कोहरे के कारण विमान और ट्रेन सेवा प्रभावित होती है। किसी न किसी कारण से विमानों की सेवा तो खराब है ही लेकिन किराए में कोई कमी नहीं है। कंपनियों को मनमाना किराया वसूलने की छूट है। सोचें, जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ और 26 लोग मारे गए तो विमान कंपनियों ने इस आपदा को अवसर बना लिया। जम्मू कश्मीर से वापस लौटने का किराया खई गुना बढ़ा दिया। महाकुंभ के समय भी देखा गया था कि विमानन कंपनियों ने दिल्ली से प्रयागराज तक का किराया 30 हजार रुपए या उससे ज्यादा कर दिया था।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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