भारत अपनी जरुरत के लिए रूस से तेल खरीदेगा या नहीं यह भारत की संप्रभुता का मामला है। यह कहने भर से काम नहीं चलेगा कि भारत ने इस तरह का कोई आधिकारिक आदेश नहीं जारी किया है कि रूस से तेल नहीं खरीदा जाएगा। ध्यान रहे जब खरीद शुरू हुई थी तब भी यह आदेश नहीं जारी हुआ था कि भारत अब बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीदेगा। जैसे चुपचाप तेल खरीद शुरू हुई वैसे ही कम हो गई है। लेकिन सवाल है कि खरीद कम होगी या पूरी तरह से बंद हो जाएगी?
कई साल के बाद इस महीने के शुरुआती 10 दिन में भारत को तेल बेचने वाले देशों में रूस नंबर एक की पोजिशन पर नहीं रहा। भारत अब सबसे ज्यादा तेल सऊदी अरब से खरीद रहा है। रूस अब दूसरे स्थान पर है। इराक तीसरे नंबर पर है। भारत की तेल कंपनियों ने वेनेजुएला से तेल खरीद के करार कर लिए हैं और अमेरिका से भी पहले से ज्यादा तेल खरीदा जाने लगा है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि भारत ने ‘प्रतिबद्धता’ जताई है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारत किसी भी देश के सामने ऐसी प्रतिबद्धता कैसे जता सकता है? इस बार में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा गया था तो उन्होंने कूटनीतिक अंदाज में गोलमोल जवाब दिया। सीधे शब्दों में रूबियो की बात का खंडन नहीं किया।


